Дили надод аз дасти як мӯи зулфи ёри хеш ро

دل نداد از دست یک مو زلف یار خویش را

То сияҳ кард аз кашокаши рӯзгори хеш ро

تا سیه کرد از کشاکش روزگار خویش را

Ихтиёрии баҳр ошиқ нест дар фармони ишқ

اختیاری بهر عاشق نیست در فرمان عشق

То қалам бикашем бар сари ихтиёри хеш ро

تا قلم بکشیم بر سر اختیار خویش را

Гирифтам то субҳи маҳшари маст аз он чашми хумор

گرفتم تا صبح محشر مست از آن چشم خمار

Нашканам ҷуз бо ҳамон соғари хумори хеш ро

نشکنم جز با همان ساغر خمار خویش را

Хоҳам андари хайли ҷонбозони нёзндм ба ном

خواهم اندر خیل جانبازان نیازندم به نام

Байнами андак чун ба роҳ ӯ нисори хеш ро

بینم اندک چون به راه او نثار خویش را

Бе қарори он зулфи мишкӣнро ҳар он бинад ба дӯш

بی‌قرار آن زلف مشکین را هر آن بیند به دوش

намедиҳад бар беқарориҳо қарори хеш ро

می‌دهد بر بی‌قراری‌ها قرار خویش را

Зоҳидӣ аз ёди ҷинати маст ва мо аз ишқи ёр

زاهدان از یاد جنّت مست و ما از عشق یار

Ҳар касе дар бутаи синҷиди айёри хеш ро

هر کسی در بوته سنجد عیار خویش را

Тири мижгонати сафиро бар нишони афканд ва хаст

تیر مژگانت صفی را بر نشان افکند و خست

Бозгир аз хок чу афкандии шикори хеш ро

بازگیر از خاک چو افکندی شکار خویش را