Бе дӯсти даст май надиҳади баҳри мо нишот
بی دوست دست میندهد بهر ما نشاط
Ало ба васл дӯст надорем инбисот
الا به وصل دوست نداریم انبساط
Ҳар дам ки бо ҳабиб нишинем фориғем
هر دم که با حبیب نشینیم فارغیم
Аз хавфу амну роҳату меҳнати ғаму нишот
از خوف و امن و راحت و محنت غم و نشاط
Он кас ки кард таии раҳи борӣки ишқ ро
آن کس که کرد طی ره باریک عشق را
Гӯ шод бош зонка гузар кардӣ аз сирот
گو شاد باش زانکه گذر کردی از صراط
Марбӯт шуд ба олами инсонияти яқин
مربوط شد به عالم انسانیت یقین
Бо аҳл ишқ ёфт ҳар он кас ки иртибот
با اهل عشق یافت هر آن کس که ارتباط
Зоҳид магӯ фасона ки безор шуд дилам
زاهد مگو فسانه که بیزار شد دلم
Ғайр аз ҳадиси ишқи з ҳар гӯнаи ихтилот
غیر از حدیث عشق ز هر گونه اختلاط
эй он ки орзӯии сулаймонят буд
ای آن که آرزوی سلیمانیت بود
Баргӯ ки дар куҷост сулаймон чаҳ шуд бисот
برگو که در کجاست سلیمان چه شد بساط
Дар орзӯии манзил мақсӯд сӯхтем
در آرزوی منزل مقصود سوختیم
Хуррами дамӣ ки рахт бабандем зии работ
خرم دمی که رخت ببندیم زی رباط
Сӯй худо гурехт сағир аз худии балӣ
سوی خدا گریخت صغیر از خودی بلی
Ҷуз бар муҳӣти рӯ ба куҷо оварад муҳот
جز بر محیط رو به کجا آورد محاط