Марои сағири тахаллус ба ҷо буд ки се чиз

مرا صغیر تخلص به‌جا بود که سه چیز

Мурод дорам ва ҳастам аз ин тахаллуси шод

مراد دارم و هستم از این تخلص شاد

Дар аввали инки ба аҳди сғортми эзад

در اول اینکه به عهد صغارتم ایزد

Забон ба гуфтани ашъори ҷон Фзо бикшод

زبان به گفتن اشعار جان‌فَزا بگشاد

Ба дувум инки нагиранд акобрми хурда

به دوم اینکه نگیرند اکابرم خرده

Агар зи хомаи ман нуқтае хато афтод

اگر ز خامهٔ من نقطه‌ای خطا افتاد

Ба сеюм инки чу рӯзи ҳисоб пеш ояд

به سوم اینکه چو روز حساب پیش آید

Мусалламаст ки онҷо буд сағири озод

مسلم است که آنجا بود صغیر آزاد