Он рӯз ки ӯро ғами хунини кафанӣ буд
آن روز که او را غم خونین کفنی بود
Ҳар гӯшаи куҷо дар раҳ ӯ ҳамчуи манӣ буд
هر گوشه کجا در ره او همچو منی بود
То мурғи дилами ҷои бкнҷ қафасӣ дошт
تا مرغ دلم جای بکنج قفسی داشت
Гуё ки напиндошт бъолми чаманӣ буд
گویا که نپنداشت بعالم چمنی بود
Гар дӯши з май ту ба шикастам аҷабӣ нест
گر دوش ز می تو به شکستم عجبی نیست
Паймона ӣ май дар кафи паймони шиканӣ буд
پیمانه ی می در کف پیمان شکنی بود
Рафт аз бар ӯ ҳар касе аз тундии хеш
رفت از بر او هر کسی از تندی خویش
Ҷузи дил ки аз он турраи бпоиши расанӣ буд
جز دل که از آن طره بپایش رسنی بود
Гуфтам касам огаҳ нашуд аз роз чу дидам
گفتم کسم آگه نشد از راز چو دیدم
Афсона ӣ ман қисса ӣ ҳар анҷуманӣ буд
افسانه ی من قصه ی هر انجمنی بود
Бо мдъёнт назарӣ дидаму мардум
با مدعیانت نظری دیدم و مردم
Ташрифи висоли туами охири кафанӣ буд
تشریف وصال توام آخر کفنی بود
То ҷон нспрдӣ нашуд огоҳи зи ҳолат
تا جان نسپردی نشد آگاه ز حالت
Пиндошт ( саҳоб ) ончӣ ту гуфтӣ суханӣ буд
پنداشت (سحاب) آنچه تو گفتی سخنی بود