Гулӣ каз оташи ғайрат гулоб ме созад
گلی کز آتش غیرت گلاب میسازد
Барои он гули ориз гулоб ме созад
برای آن گل عارض گلاب میسازد
Ба ёди маҳфили васлат ки мекунад муҳкам
به یاد محفل وصلت که میکند محکم
Сиришки ман ҳамаи олам хароб ме созад
سرشک من همه عالم خراب میسازد
Ба коми заҳр мукофот хоҳадам умрӣ
به کام زهر مکافات خواهدم عمری
Дамии зи хешам агар комёб ме созад
دمی ز خویشم اگر کامیاب میسازد
Магӯ ки бе худии мо ниқоби дидаи мост
مگو که بیخودی ما نقاب دیدهٔ ماست
Чаро ҷамоли ниҳон дар ниқоб ме созад
چرا جمال نهان در نقاب میسازد
зи бас ки тоб надорад ( саҳоб ) табъи дилам
ز بس که تاب ندارد (سحاب) طبع دلم
Аз он ба сунбули пари печ ва тоб ме созад
از آن به سنبل پر پیچ و تاب میسازد