Монанди ман сегӣ сари кӯии ҳабиб ро

مانند من سگی سر کوی حبیب را

Бояд каз ошно нашносад ғариб ро

باید کز آشنا نشناسد غریب را

Дардо ки дилбарӣ набӯд ҷузи ту то ба ту

دردا که دلبری نبود جز تو تا به تو

Чанде кунам талофии рашки рақиб ро

چندی کنم تلافی رشک رقیب را

Онҷо ки зулф ва рӯй ту бошад ниҳон кунад

آنجا که زلف و روی تو باشد نهان کند

Аз шарми брҳмни буту тарсои салиб ро

از شرم برهمن بت و ترسا صلیب را

Тозин баҳона бознагардад зи ним раҳ

تازین بهانه بازنگردد ز نیم ره

Огаҳи з мурданам накунад каси табиб ро

آگه ز مردنم نکند کس طبیب را

Дар ин чамани дареғ ки фарқӣ наме кунад

در این چمن دریغ که فرقی نمی کند

Аз бонги зоғи замзама ӣ андалеб ро

از بانگ زاغ زمزمه ی عندلیب را

Он ба ки ҳасрати ту буд чун шуд аз азал

آن به که حسرت تو بود چون شد از ازل

Ҳасрати насиби ин дили ҳасрати насиб ро

حسرت نصیب این دل حسرت نصیب را

Гуё вафо ба ваъда кунад комшби изтироб

گویا وفا به وعده کند کامشب اضطراب

Афзӯн заҳр шабаст дили ношикеб ро

افزون زهر شبست دل ناشکیب را

Зоҳид ба тарки ишқи фиребами нмидҳд

زاهد به ترک عشق فریبم نمیدهد

Гуё ки дидаи он рухи зоҳиди фиреб ро

گویا که دیده آن رخ زاهد فریب را

Дорад ( саҳоб ) то тани урён чаҳ ҷилваи сарв

دارد (سحاب) تا تن عریان چه جلوه سرو

Чун ӯ равад бҷлўаҳи қади ҷомаи зеб ро

چون او رود بجلوه قد جامه زیب را