Коши онкӣ бар омехт ба меҳраши гули мо ро
کاش آنکه بر آمیخت به مهرش گِل ما را
Медод ба беМеҳрӣ ӯ хуи дили мо ро
میداد به بی مهری او خو دل ما را
Бар хок нагорд хат бе ҷурмии мақтӯл
بر خاک نگارد خط بی جرمی مقتول
Хӯнӣ ки з шамшер чакад қотили мо ро
خونی که ز شمشیر چکد قاتل ما را
Дар оинаи байни он рухи матбӯъ ки шояд
در آینه بین آن رخ مطبوع که شاید
Ҳам ҳасан ту гирад з ту дод дили мо ро
هم حسن تو گیرد ز تو داد دل ما را
Инаст агар тарбияти абри каромат
اینست اگر تربیت ابر کرامت
Шармандагӣ аз барқ расад ҳосили мо ро
شرمندگی از برق رسد حاصل ما را
Аз мастӣ ӯ ҳеҷ ба маҳфил ғаразӣ нест
از مستی او هیچ به محفل غرضی نیست
Ҷузи инки наёбади нигаҳи ғофили мо ро
جز اینکه نیابد نگه غافل ما را
Ҳиҷри ту ба мо кор ба мурдан кунад осон
هجر تو به ما کار به مردن کند آسان
Каз васли ту осон набӯд мушкили мо ро
کز وصل تو آسان نبود مشکل ما را
То базм ки аз ӯ шудаи пари нур ( сҳобо )
تا بزم که از او شده پر نور (سحابا)
Комшб набӯд нурӣ аз ӯ маҳфили мо ро
کامشب نبود نوری از او محفل ما را
Бар сари наъши оннигор длнўоз омад маро
بر سر نعش آن نگار دلنواز آمد مرا
Боз дар тани ҷон аз тани рафта боз омад маро
باز در تن جان از تن رفته باز آمد مرا
Чора ӣ дардам ба мурдан кард дили бечора ӯ
چارهٔ دردم به مردن کرد دل بیچاره او
Дар ғами ишқи ту охири чора соз омад маро
در غم عشق تو آخر چاره ساز آمد مرا
Нави ниҳоли умри коФсрд аз сумуми ҳиҷри боз
نو نهال عمر کافسرد از سموم هجر باز
Аз насими васл ӯ дар эҳтизоз омад маро
از نسیم وصل او در اهتزاز آمد مرا
Гар набӯд он моҳи шамъи базми ағёр аз чаҳ дӯш
گر نبود آن ماه شمع بزم اغیار از چه دوش
Шамъи ҷони афзӯни заҳри шаб дар гудоз омад маро ?
شمع جان افزون ز هر شب در گداز آمد مرا؟
Чун дар майхона багушӯданд гӯйӣ баста шуд
چون در میخانه بگشودند گویی بسته شد
Бар рухи дил ҳар дар меҳнат ки боз омад маро
بر رخ دل هر درِ محنت که باز آمد مرا
Фориғам аз нози гул зеро ки дар кунҷи қафас
فارغم از ناز گل زیرا که در کنج قفس
Мурғи дил аз асири гулшан бениёз омад маро
مرغ دل از سیْر گلشن بی نیاز آمد مرا
Аз баландии давр аз он зулфи дарози имшаб ( саҳоб )
از بلندی دور از آن زلف دراز امشب (سحاب)
Ёдгори он сари зулф дароз омад маро
یادگار آن سر زلف دراز آمد مرا