Сипеди гашти ду чашмам дар интизори нигоҳӣ

سپید گشت دو چشمم در انتظار نگاهی

Ки сӯй ман кунад аммо накард чашми сиёҳӣ

که سوی من کند اما نکرد چشم سیاهی

Збим онкӣ ндонанд кист қотилами афғон

زبیم آنکه ندانند کیست قاتلم افغان

Ки ҷониб ту накардам , ба ҳашар низ нигоҳӣ

که جانبِ تو نکردم ، به حشر نیز نگاهی

Фитад ба гардани ман ҷурми хӯни ман ба қиёмат

فتد به گردن من جرم خون من به قیامت

Ки кӯдакии ту ва набӯд ҳануз бар ту гуноҳӣ

که کودکی تو و نبود هنوز بر تو گناهی

Ба ғайри дил ки маҷоли сухан бар ту надорад

به غیر دل که مجال سخن بر تو ندارد

зи ман фиғон ки надорад касе бкўии ту роҳӣ

ز من فغان که ندارد کسی بکوی تو راهی

Мабар гумон ки зҷўри фалак касе буд эмин

مبر گمان که زجور فلک کسی بود ایمن

Магар касе ки ба майхона ёфтааст паноҳӣ

مگر کسی که به میخانه یافته است پناهی

зи ҷаври даҳри чунин сӯзам аз чаҳ ман ки тавонам

ز جور دهر چنین سوزم از چه من که توانم

Ба хирманаши Фгнми оташ аз шарора ӣ оҳӣ

به خرمنش فگنم آتش از شراره ی آهی

( саҳоб ) тухми вафоро , ба ҳар замин ки фишондам ,

(سحاب) تخمِ وفا را ،  به هر زمین که فشاندم،

Ба ғайри хори надомат аз он нараст гиёҳӣ

به غیر خار ندامت از آن نرست گیاهی