Чун Юсуфи мангар ба нкўӣӣ писарӣ дошт
چون یوسف من گر به نکوئی پسری داشت
Ёқӯби зи ҳоли дили зорам хабарӣ дошт
یعقوب ز حال دل زارم خبری داشت
эй дили з чаҳ рӯи мунтазири субҳи висолӣ
ای دل ز چه رو منتظر صبح وصالی
Кӣ буд ки аз паии шаби ҳиҷрон саҳарӣ дошт ?
کی بود که از پی شب هجران سحری داشت؟
ё раб ба чаҳ ҷурм аз назар андохта моро ?
یا رب به چه جرم از نظر انداخته ما را؟
Он шоҳ ки бар ҳоли гадоён назарӣ дошт
آن شاه که بر حال گدایان نظری داشت
Май барад агар сангдилии дили зи каф ӯ
میبرد اگر سنگدلی دل ز کف او
Он сангдил аз ҳоли дили ман хабарӣ дошт
آن سنگدل از حال دل من خبری داشت
Аз доми тўоши хоҳиши парвоз наме буд
از دام تواش خواهش پرواز نمیبود
Он рӯз ки мурғи дили ман бол ва парӣ дошт
آن روز که مرغ دل من بال و پری داشت
Раҳи ҷониби мақсад ба раҳи ишқи куҷои барад
ره جانب مقصد به ره عشق کجا برد
Ҳар кас чу дили гмраҳи ман роҳбарӣ дошт
هر کس چو دل گمره من راهبری داشت
Сангини дил ва бе раҳми саҳоби ин ҳама кӣ буд
سنگین دل و بی رحم سحاب اینهمه کی بود
Гар оҳи дили ман ба дил ӯ асарӣ дошт
گر آه دل من به دل او اثری داشت