Гуфтӣ дил аз қафои накӯён кадом рафт
گفتی دل از قفای نکویان کدام رفت
Ҳар ҷо ки дид сару қадии хуш хиром рафт
هر جا که دید سر و قدی خوش خرام رفت
Доне ки дошт тавба ӣ ман то ба кӣ сабот
دانی که داشت توبه ی من تا به کی ثبات
Чандон ки аз сабу май гулгун ба ҷом рафт
چندان که از سبو می گلگون به جام رفت
Ҳаргиз намешавад ки шавад ном ӯ баланд
هرگز نمی شود که شود نام او بلند
Дар ошиқӣ касе ки паии нанг ва ном рафт
در عاشقی کسی که پی ننگ و نام رفت
Бодаши ҳароми лиззати санги ҷафои ту
بادش حرام لذت سنگ جفای تو
Мурғи дилам ки биҳдаҳ зон тараф бом рафт
مرغ دلم که بیهده زان طرف بام رفت
Аз як ҷавоби хотири моро накард шод
از یک جواب خاطر ما را نکرد شاد
Аз мо агар бҷонб ӯ сад паём рафт
از ما اگر بجانب او صد پیام رفت
Ҷоӣии зи кунҷи доми ту дил ҷӯяд аз куҷо
جائی ز کنج دام تو دل جوید از کجا
Гирам ки ин асир тавонад з дом рафт
گیرم که این اسیر تواند ز دام رفت
Ҳам ёр буд душмани ҷонами ҳам осмон
هم یار بود دشمن جانم هم آسمان
То аз ки бар ман ин ситам ва аз кадом рафт
تا از که بر من این ستم و از کدام رفت
Дорад ( саҳоб ) раҳ ба ту аммо бсди умед
دارد (سحاب) ره به تو اما بصد امید
Субҳ омад ар ба кӯии ту навмед шом рафт
صبح آمد ار به کوی تو نومید شام رفت