Чу шуъла гарм даромад , чу гул ба тоб нишаст
چو شعله گرم درآمد، چو گل به تاب نشست
Чароғ бода биёред коФтоб нишаст
چراغ باده بیارید کآفتاب نشست
Чу ноумеди азуи гашт , дил қарор гирифт
چو ناامید ازو گشت، دل قرار گرفت
Сапанди сӯхта чун шуд з изтироб нишаст
سپند سوخته چون شد ز اضطراب نشست
Ба шамъи анҷумани мо насим муҳаррам нест
به شمع انجمن ما نسیم محرم نیست
Азон зи парда ӣ фонӯс дар ниқоб нишаст
ازان ز پرده ی فانوس در نقاب نشست
Ба базми бодаи Марв бесаҳифа ӣ ғазалӣ
به بزم باده مرو بی صحیفه ی غزلی
Сафина Эй баталаб то тавон ба об нишаст
سفینه ای بطلب تا توان به آب نشست
Нишаст ёр чу пешат , намоз чист салим
نشست یار چو پیشت، نماز چیست سلیم
Намози хеш қазо кун ки офтоб нишаст
نماز خویش قضا کن که آفتاب نشست