Мижгони ман вазифа хуноб ме хӯрд
مژگان من وظیفهٔ خوناب میخورد
Ғўози нони зи суфра гирдоб ме хӯрд
غواض نان ز سفرهٔ گرداب میخورد
Доғами зи дасти лола ки дар мавсими баҳор
داغم ز دست لاله که در موسم بهار
Дорад шароб дар қадаҳ ва об ме хӯрд
دارد شراب در قدح و آب میخورد
Бенағмае шукуфта нагардад дил аз шароб
بینغمهای شکفته نگردد دل از شراب
Хуррами дилӣ ки оби з дулоб ме хӯрд
خرم دلی که آب ز دولاب میخورد
Зоҳид ба хонаи ҷоми булӯрам ба тоқ дид
زاهد به خانه جام بلورم به طاق دید
Гуфт ин гули кадуи зи куҷо об мехӯрд ? !
گفت این گل کدو ز کجا آب میخورد؟!
Манъаш макун ки дар назараши тоқи абрӯеи сет
منعش مکن که در نظرش طاق ابروییست
Он кас ки май ба гӯша миҳроб ме хӯрд
آن کس که می به گوشهٔ محراب میخورد
Ҳайрони изтироби гул ва лолаам , магар
حیران اضطراب گل و لالهام، مگر
Оби ин чамани зи шабнам симоб мехӯрд ?
آب این چمن ز شبنم سیماب میخورد؟
Осоишӣ намонда зи ақлу ҷунуни маро
آسایشی نمانده ز عقل و جنون مرا
Дар ишқ риштаам зи ду сар тоб ме хӯрд
در عشق رشتهام ز دو سر تاب میخورد
Мурғии ним ки донаи хур бӯстон шавам
مرغی نیم که دانهخور بوستان شوم
Аз чашмасор дом , дилам об ме хӯрд
از چشمهسار دام، دلم آب میخورد
Занҷирро кашокаши девонаи бугсалад
زنجیر را کشاکش دیوانه بگسلد
Зулфи ту тоб аз дил бетоб ме хӯрд
زلف تو تاب از دل بیتاب میخورد
Мастии салими боди ҳалол касе ки май
مستی سلیم باد حلال کسی که می
Дар рӯзи абр ва дар шаб маҳтоб ме хӯрд
در روز ابر و در شب مهتاب میخورد