Шуд мӯии Хизр дар талабати ҷобаи ҷои сифед

شد موی خضر در طلبت جابه جا سفید

Моро зи мӯии сар шуда то хори пои сифед

ما را ز موی سر شده تا خار پا سفید

Сар рафтааст ва аз сари кӯяш наме рӯм

سر رفته است و از سر کویش نمی روم

Раҳмати барин саботи қадам , рӯй мо сифед !

رحمت برین ثبات قدم، روی ما سفید!

Чун шохи ёсумани зи хироми ту сарв ро

چون شاخ یاسمن ز خرام تو سرو را

Бар тани зи шасту шӯй арақ шуд қабои сифед

بر تن ز شست و شوی عرق شد قبا سفید

эй мушти устихон чаҳ ба ҷои мондае , ки шуд

ای مشت استخوان چه به جا مانده ای، که شد

Дар роҳи интизори ту чашми ҳумои сифед

در راه انتظار تو چشم هما سفید

Перему Тифли ханда ба тадбир мо кунад

پیریم و طفل خنده به تدبیر ما کند

Чун субҳ , мӯии мо шуда дар Асияи сифед !

چون صبح، موی ما شده در آسیا سفید!

Чашмии сиёҳ сохта будам бирав салим

چشمی سیاه ساخته بودم برو سلیم

Аз гиря кард оқибати он бе вафои сифед

از گریه کرد عاقبت آن بی وفا سفید