Чу гул касе ки ҳавои ту бардаи оромиш
چو گل کسی که هوای تو برده آرامش
зи мавҷи бихўдии бодаи бишиканади ҷомаш
ز موج بیخودی باده بشکند جامش
Кунад зи зулфи ту сайёд , хок аз он бар сар
کند ز زلف تو صیاد، خاک از آن بر سر
Ки ғайри хок чу ғарбол нест дар домаш
که غیر خاک چو غربال نیست در دامش
Ҷавоби нома ӣ моро , зи бас тағофул кард
جواب نامه ی ما را، ز بس تغافل کرد
Ҳазор байзаи кабӯтари ниҳод дар бомаш
هزار بیضه کبوتر نهاد در بامش
Кадоми дил ки нашуд сайди ин сияҳи чашмон
کدام دل که نشد صید این سیه چشمان
Фиғони зи ҳинду ғизолони широндомш
فغان ز هند و غزالان شیراندامش
Ба серумаи амли он кас ки чашми сохт сиёҳ
به سرمهٔ امل آن کس که چشم ساخت سیاه
Сифед кард ҷаҳони ҳамчуи мағзи бодомаш
سفید کرد جهان همچو مغز بادامش
Фиреби анҷумани ишқро салим мапурс
فریب انجمن عشق را سلیم مپرس
Кабоб кист ки оташ намекунад хомаш ?
کباب کیست که آتش نمی کند خامش؟