Хуши он рӯзӣ ки май дар ҳар чаман бебок ме хӯрдам

خوش آن روزی که می در هر چمن بی‌باک می‌خوردم

Ба дастам буд агар ҷомӣ , ба пой ток ме хӯрдам

به دستم بود اگر جامی، به پای تاک می‌خوردم

зи соқӣ , ҷом менагирифтан зоҳид ҳалокам кард

ز ساقی، جام می نگرفتن زاهد هلاکم کرد

Ба дасти ман агар медод , онро пок мехӯрдам !

به دست من اگر می داد، آن را پاک می‌خوردم!

Муҳаббат кард аз баси талх бар ман зиндагонӣ ро

محبت کرد از بس تلخ بر من زندگانی را

Агар заҳрам намедод осмон , тирёк мехӯрдам !

اگر زهرم نمی‌داد آسمان، تریاک می‌خوردم!

Паии рӯзии аҷабгар тарк истиғно кунам акнӯн

پی روزی عجب گر ترک استغنا کنم اکنون

Ки дар айёми тифлӣ аз қаноат хок ме хӯрдам

که در ایام طفلی از قناعت خاک می‌خوردم

Салим аз бе шаробии мубталои сад ғаму дардам

سلیم از بی‌شرابی مبتلای صد غم و دردم

Агар май доштам май , кӣ ғам афлок мехӯрдам ?

اگر می‌داشتم می، کی غم افلاک می‌خوردم؟