эй манзили моҳи илмат , авҷи сурайё
ای منزل ماه علمت، اوج ثریا
Рӯй зафар аз ойӣнаи теғи ту пайдо
روی ظفر از آیینه تیغ تو پیدا
Чун теғи ту базли ту гирифтаи ҳамаи олам
چون تیغ تو بذل تو گرفته همه عالم
Чун сяти ту адли ту расида ба ҳамаи ҷо
چون صیت تو عدل تو رسیده به همه جا
Гар сипаҳат хол занад бар рухи хуршед
گر سپهت خال زند بر رخ خورشید
Мавҷи карамат об кунад Зуҳраи дарё
موج کرمت آب کند زهره دریا
Дар охири маншури абади аҳди ту таърих
در آخر منشور ابد عهد تو تاریخ
Дар аввали аҳкоми азали номи ту тғро
در اول احکام ازل نام تو طغرا
эй хони замони шайхи Увайси онкии зи таъзим
ای خان زمان شیخ اویس آنکه ز تعظیم
Шоҳони ҷаҳонро дар ту каъбаи улё !
شاهان جهان را در تو کعبه علیا!
Як шама ба айвони ту хуршеди мунаввар
یک شمه به ایوان تو خورشید منور
Як хайма дар урдӯии ту гардуни мъло
یک خیمه در اردوی تو گردون معلا
Ки мори синони ту гузидаи дили душман
که مار سنان تو گزیده دل دشمن
Гуҳи шери ливои ту даридаи сафи ҳиҷо
گه شیر لوای تو دریده صف هیجا
Дар гӯр ба аҳд ту бинозад дили баҳром
در گور به عهد تو بنازد دل بهرام
Дар адл ба аҳдати бФрозди сари доро
در عدل به عهدت بفرازد سر دارا
Ковӯс ва кӣ навзару Ҳушангу Фаридун
کاووس و کی نوذر و هوشنگ و فریدون
Карда чу саодат ба ҷаноби ту тавалло
کرده چو سعادت به جناب تو تولا
эй дидаи идроки ту ар манзари имрӯз
ای دیده ادراک تو ار منظر امروز
Нозир шуда бар коргаҳи олами фардо !
ناظر شده بر کارگه عالم فردا!
Ваии ҳиммати волои ту берун зада хайма
وی همت والای تو بیرون زده خیمه
Аз прдҳсрои фалаки атласи воло !
از پردهسرای فلک اطلس والا!
Ақл аз равиши рой ту омӯхта қонӯн
عقل از روش رای تو آموخته قانون
Рӯҳ аз асари тлФи ту андӯхтаи эҳё
روح از اثر طلف تو اندوخته احیا
Дар саҷдаи даргоҳ ту хоҳанд ки бошанд
در سجده درگاه تو خواهند که باشند
Аҷром ба яксар ду сар аз ҳирс ва чу ҷавзо
اجرام به یکسر دو سر از حرص و چو جوزا
Чатрат ба фалак гуфт ки болои Марв эй чарх !
چترت به فلک گفت که بالا مرو ای چرخ!
Зеро ки маро мерасад ин мансаби воло
زیرا که مرا میرسد این منصب والا
Бардоштан теғу каманд ар чаҳ гуноҳ аст
برداشتن تیغ و کمند ار چه گناه است
Дар аҳд ту ҳаст ин ҳама дар гардани аъдо
در عهد تو هست این همه در گردن اعدا
Бадхоҳи сбксори туро ваъда марг аст
بدخواه سبکسار تو را وعده مرگ است
Зон гурзгаронаш ба сар омад ба тақозо
زان گرز گرانش به سر آمد به تقاضا
Инсофи зи шамшери ту бо ин ҳамаи тезӣ
انصاف ز شمشیر تو با این همه تیزی
Бо хасми ситамкор басӣ кард мудоро
با خصم ستمکار بسی کرد مدارا
Он лаҳза ки аз захми сару найзаи пайкор
آن لحظه که از زخم سر و نیزه پیکار
Чун хона занбӯр шавад , синаи аъдо
چون خانه زنبور شود، سینه اعدا
Аз бас ки барояд ба фалаки гирди ду лашгар
از بس که برآید به فلک گرد دو لشگر
Чун тӯда ғбро шавад , ин қабзаи хзро
چون توده غبرا شود، این قبضه خضرا
Аз захми сдоъи фазаъи кӯсу садояш
از زخم صداع فزع کوس و صدایش
Фарёд бар ояд зи зли сахраи смо
فریاد بر آید ز ذل صخره صما
Он рӯзи ҳамаи рӯзи забону лаби шамшер
آن روز همه روز زبان و لب شمشیر
Бошанд ба авсофи Аёдии ту гуё
باشند به اوصاف ایادی تو گویا
Чун дид пураз боди сиррии хасми туро теғ
چون دید پراز باد سری خصم تو را تیغ
Чун шамъ ба гардан занадаш , кард мудоро
چون شمع به گردن زندش، کرد مدارا
Рӯзии маи роят агар ореи сӯии гардун
روزی مه رایت اگر آری سوی گردون
Роят бигушоед ба маии қалъаи мино
رایت بگشاید به مهی قلعه مینا
Гар қалъаи ҳафтуми нспорд ба ту кайвон
گر قلعه هفتم نسپارد به تو کیوان
Садбори фурӯди ореи азин қалъаи Зуҳал ро
صدبار فرود آری ازین قلعه زحل را
эй мсъди аълои млоики гуҳи парвоз !
ای مصعد اعلای ملایک گه پرواز!
Мурғи ҳарами фикри туро мҳбти адно
مرغ حرم فکر تو را مهبط ادنا
эй сояи ҳақи партави анвори илоҳӣ !
ای سایه حق پرتو انوار الهی!
Дар носиаҳ туаст чу хуршеди ҳувайдо
در ناصیه توست چو خورشید هویدا
Бе дардисари найза ва омад шуд пайкон
بیدردسر نیزه و آمد شد پیکان
Бе онкии лаб зер кунад теғ ба боло
بیآنکه لب زیر کند تیغ به بالا
Атрофи билод ту шуд аз амн , музайян
اطراف بلاد تو شد از امن، مزین
Асбоби мурод ту шуд аз фатҳ , муҳайё
اسباب مراد تو شد از فتح، مهیا
Алмнаҳи ллаҳ ки дарин фатҳи надорӣ
المنه لله که درین فتح نداری
Ҷузи миннати ллаҳи табораку таъолӣ
جز منت لله تبارک و تعالی
Шоҳо ! чу сари ганҷи лоли маъонӣ
شاها! چو سر گنج لال معانی
Багушӯда замирам ба санои ту дар асно
بگشوده ضمیرم به ثنای تو در اثنا
Ногоҳ хаёли санам дар назар омад
ناگاه خیال صنم در نظر آمد
Меҳри рух ӯ сар зад азин матлаъи ғро
مهر رخ او سر زد ازین مطلع غرا
К-эии кори марои зулф ту андохта дар по !
کای کار مرا زلف تو انداخته در پا!
Аз даври рахт , рози дили ман шудаи расво !
از دور رخت، راز دل من شده رسوا!
Ҳам лаъли ту ҷомӣаст , лаболаби ҳамаи гавҳар
هم لعل تو جامی است، لبالب همه گوهر
Ҳам зулфи ту домӣаст , саросари ҳамаи савдо
هم زلف تو دامی است، سراسر همه سودا
Аз боди саҳари шоми ду зулфи ту мушавваш
از باد سحر شام دو زلف تو مشوش
Вази шоми парешони ту хуршеди муҷаззо
وز شام پریشان تو خورشید مجزا
Афтода ба ҳар ҳалқае аз зулфи ту , ошӯб
افتاده به هر حلقهای از زلف تو، آشوب
Бархест ба ҳргўшаҳ эй аз чашми ту , ғавғо
برخاست به هرگوشهای از چشم تو، غوغا
Бинишонад таҷаллии ҷамоли ту ба икдм
بنشاند تجلی جمال تو به یکدم
Дар зери фалаки шамъи ҷаҳони тоб , масеҳо
در زیر فلک شمع جهان تاب، مسیحا
Вази шавқи ҷамоли ту дилам хӯн шуд ва ҳар дам
وز شوق جمال تو دلم خون شد و هر دم
Бар манзараи чашм ман ояд ба тамошо
بر منظره چشم من آید به تماشا
Дарди дили ушшоқи турои сабр , мудовост
درد دل عشاق ترا صبر، مداواست
Дардо ва дариғо ки маро нест мудово
دردا و دریغا که مرا نیست مداوا
Онҷо ки рахти дили зстми барда ба ғорат
آنجا که رخت دل زستم برده به غارت
Сад ҷони лаби ширин ту оварад ба яғмо
صد جان لب شیرین تو آورد به یغما
Мижгони ту барҳам зада ҳар дами дили аҳбоб
مژگان تو برهم زده هر دم دل احباب
Чун қалби адуи теғи шҳншаҳи гуҳи ҳиҷо
چون قلب عدو تیغ شهنشه گه هیجا
Шоҳо ! манам он баҳри маъонӣ ки ба мадҳат
شاها! منم آن بحر معانی که به مدحت
Шуд ҳалқа ба гӯши суханам , лўлўи лоло
شد حلقه به گوش سخنم، لولو لالا
Низоми гавҳарпарвар табъам ба саноят
نظام گوهر پرور طبعم به ثنایت
Дар назми расонади суханамро ба сурайё
در نظم رساند سخنم را به ثریا
То оби рухи мамлакату оинаи адл
تا آب رخ مملکت و آینه عدل
Аз гирди сипоҳу дам теғаст , мусаффо
از گرد سپاه و دم تیغ است، مصفا
Бодои ҳамагии нақши муроди ту мусаввир
بادا همگی نقش مراد تو مصور
Дар носиаҳи ин фалаки ойӣнаи симо
در ناصیه این فلک آیینه سیما
Чашми фалак аз гирди сипоҳи ту , мкҳл
چشم فلک از گرد سپاه تو، مکحل
Рӯй зафар аз хӯни адуии ту , мтро
روی ظفر از خون عدوی تو، مطرا