Моҳӣ ар моҳи фалакро аз камони абрӯ буд
ماهی ار ماه فلک را از کمان ابرو بود
Сарвӣ ар сарви сеиро анбарин гесу буд
سروی ار سرو سهی را عنبرین گیسو بود
Мо ки ҳар рӯзӣ ба моҳ талъатат гирем фол
ما که هر روزی به ماه طلعتت گیریم فال
Рӯзу моҳи мо муборак , фоли мо некӯ буд
روز و ماه ما مبارک، فال ما نیکو بود
зи офтоб рӯй хубат , дидаи ман хираи гашт
ز آفتاب روی خوبت، دیده من خیره گشت
Хира гардад дида ҷое коФтоб аз рӯ буд
خیره گردد دیده جایی کافتاب از رو بود
Сарви қадати рости ҷобири ҷӯйбори чашму дил
سرو قدت راست جابر جویبار چشم و دل
Ҳбзои боғӣ ки сурӯши ин чунин дилҷӯ буд
حبذا باغی که سروش این چنین دلجو بود
Бас ки дам хӯрдам ба бӯят ,гар намоями ҳоли дил
بس که دم خوردم به بویت، گر نمایم حال دل
Ғунчаи осо дар дилами хӯни бастаи ту бар ту буд
غنچه آسا در دلم خون بسته تو بر تو بود
Мо ба савдои сари зулфи ту чун гирдем хок
ما به سودای سر زلف تو چون گردیم خاک
Боди гардии коўрд зон хоки анбари бӯ буд
باد گردی کآورد زان خاک عنبر بو بود
Заҳмати султони мада бисёр ва бигзор эй рақиб !
زحمت سلطان مده بسیار و بگذار ای رقیب!
То надими маҷлиси гули булбули хуши гӯ буд
تا ندیم مجلس گل بلبل خوش گو بود