Чаҳ нивисам ки дил аз дарди фироқат чаҳ кашид ?
چه نویسم که دل از درد فراقت چه کشید؟
ё зи нодиднти ин дидаи ғами дида чаҳ дид ?
یا ز نادیدنت این دیده غم دیده چه دید؟
Ба умедӣ ки расад дар ту дили хоми тамаъ
به امیدی که رسد در تو دل خام طمع
Солҳо деги ҳаваси пухт ва ба охир нарасед
سالها دیگ هوس پخت و به آخر نرسید
Қиссаи ин дил девона дарозаст ва мапурс :
قصه این دل دیوانه درازست و مپرس:
Ки дар он силсилаи зулфи парешон чаҳ кашид ?
که در آن سلسله زلف پریشان چه کشید؟
Қиссаи роз ту мардем ва нагуфтем ба кас
قصه راز تو مردیم و نگفتیم به کس
Бишинав ин қисса ки ҳаргиз ба ҷаҳон кас нишнид
بشنو این قصه که هرگز به جهان کس نشنید
Ошиқ сӯрат туаст оина ва ин сӯрат
عاشق صورت توست آینه و این صورت
Ҳаст дар чеҳраи ойӣна чу хуршеди падед
هست در چهره آیینه چو خورشید پدید
Сари зулфи ту марои тавбаи номӯси шикаст
سر زلف تو مرا توبه ناموس شکست
Чашми масти ту марои парда солус дарид
چشم مست تو مرا پرده سالوس درید
Ҷуръа дар даври ту расмӣаст ки натавон андохт
جرعه در دور تو رسمی است که نتوان انداخت
Хирқа дар аҳди ту айбӣаст ки натавон пӯшед
خرقه در عهد تو عیبی است که نتوان پوشید
Душманонгар ҳама карданд забон чун шамшер
دشمنان گر همه کردند زبان چون شمشیر
Нест мумкин ки маро аз ту тавонанд бурид
نیست ممکن که مرا از تو توانند برید
Хост то шарҳи фироқ ту нависад салмон
خواست تا شرح فراق تو نویسد سلمان
Ҳоли дил дар қалам омад зи қалами хӯни бчкид
حال دل در قلم آمد ز قلم خون بچکید