Ҳар хадангӣ ки зи дасти ту ба ҷон ме расадам
هر خدنگی که ز دست تو به جان میرسدم
Ман чаҳ гӯям ки чаҳ роҳат ба равон мерасадам ?
من چه گویم که چه راحت به روان میرسدم؟
Худ гирифтам ки ба ман давлат васлат нарасад
خود گرفتم که به من دولت وصلت نرسد
Новакии охир аз он даст ва камон ме расадам
ناوکی آخر از آن دست و کمان میرسدم
Ман ки бошам ки расад дидан рӯй ту ба ман
من که باشم که رسد دیدن روی تو به من
Ин қадари бас ки ба кӯии ту фиғон ме расадам
این قدر بس که به کوی تو فغان میرسدم
Булбули боғи ҷамоли туам аз гулбуни васл
بلبل باغ جمال توام از گلبن وصل
Гар ба рангӣ нарасм бӯе аз он ме расадам
گر به رنگی نرسم بویی از آن میرسدم
Тарки савдои ту ҳаргиз накунам , манъ чаҳ суд ?
ترک سودای تو هرگز نکنم، منع چه سود؟
Худ гирифтам нарасм бӯе аз он ме расадам
خود گرفتم نرسم بویی از آن میرسدم
Нола омад ки кунад бо ту баёни ҳоли дилам
ناله آمد که کند با تو بیان حال دلم
Винки андари ақабаши ашк равон ме расадам
وینک اندر عقبش اشک روان میرسدم
Рози сари бастаи зулфи ту намеёрам гуфт
راز سر بسته زلف تو نمییارم گفت
Ки забон май кашанд чун ба забон май рсндм
که زبان میکشند چون به زبان میرسندم
Аз фироқат натавонам ки занами дами кони дам
از فراقت نتوانم که زنم دم کان دم
Шуълаи шавқи ту аз дил ба даҳон ме расадам
شعله شوق تو از دل به دهان میرسدم
Аз ту пинҳон чаҳ кунад ҳоли дили худ салмон
از تو پنهان چه کند حال دل خود سلمان
Ки ҳикоят ба дили халқи ҷаҳон май рсндм
که حکایت به دل خلق جهان میرسندم