эй дарди ишқи дили шиканат , орзӯии ман

ای درد عشق دل شکنت، آرزوی من

Ишқаст одати туу дардасти хуии ман

عشق است عادت تو و دردست خوی من

Ҷузи дард ишқ нест марои орзӯ , мабод !

جز درد عشق نیست مرا آرزو، مباد!

Он рӯзро ки кам шавад ин орзӯии ман

آن روز را که کم شود این آرزوی من

Бархестам зи кӯии ту чун гирд , ишқ гуфт :

برخاستم ز کوی تو چون گرد، عشق گفت:

Биншин ки нест роҳ бурун шуд зи кӯии ман

بنشین که نیست راه برون شد ز کوی من

Хӯн мехӯрам ба ҷой май ва завқ мастем

خون می‌خورم به جای می و ذوق مستیم

Донад касе ки хӯрд дамӣ аз сабуии ман

داند کسی که خورد دمی از سبوی من

Аз чашм ман бирафт чу об ва дар оташам

از چشم من برفت چو آب و در آتشم

Кони рафта низ боз кӣ ояд ба ҷӯии ман ?

کان رفته نیز باز کی آید به جوی من؟

Он сарви саркаши мутамойил ки майл ӯ

آن سرو سرکش متمایل که میل او

Бошад ба ҷониби ҳамаи ало ба сӯии ман

باشد به جانب همه الا به سوی من

Салмони зи ҷумлаи халқи гирифтори баради гӯй

سلمان ز جمله خلق گرفتار برد گوی

Фии алҷмлаҳ то куҷо расад ин гуфту гӯии ман ?

فی‌الجمله تا کجا رسد این گفت و گوی من؟