Маи шаъбони гузашту гашти аён

مهِ شعبان گذشت و گشت عیان

Пайки моҳи мубораки рамазон

پیکِ ماهِ مبارکِ رمضان

эй ғазал хон ман ғазал бар хон

ای غزل‌خوانِ من! غزل برخوان

Ғазалии тозау бмои мисатон

غزلی تازه و به ما مستان

Шӯ бар ғами ҳасуди бода гусор

شو به رغمِ حسود، باده‌گسار

Кӯи чунон умру кўчнони иқбол

کو چنان عُمر و کو چنان اقبال؟

Ки дигар бора дар маи шавол

که دگر باره در مَهِ شوال

зи ғами рӯзгори фориғи бол

ز غمِ روزگار، فارغ‌بال

Ба нишинем хусраму хушҳол

بنشینیم خرّم و خوشحال

Савми худ роз мекунем ифтор

صومِ خود را زِ مِی کنیم افطار!

Ду се рӯзӣ ба рӯзаи монда ки боз

دو سه روزی به روزه مانده که باز

Хам шавад қоматами зи бори намоз

خم شود قامتم ز بارِ نماز

Ҳолиё аз пай кулӯх андоз

حالیا از پیِ «کلوخ‌انداز»

Соғар май ба гардиши овози боз

ساغرِ مِی به گردش آور باز

Тоз кори афкании марои як бор

تا ز کار افکنی مرا یک‌بار

Он чунон маст кун маро аз май

آن‌چنان مست کن مرا از مِی

Ки шавад савми ман ба мастии тай

که شود صومِ من به مستی طی

Май ба соғари брири пай дар пай

مِی به ساغر بریز پی‌درپی

Бо дафу авд ва ба рабту бонӣ

با دف و عود و بَربَط و با نی

БоБами вазири чангу мўсиқор

با بَم و زیرِ چنگ و موسیقار

На май духти руз буд ғаразам

نه مِیِ دختِ رَز بُوَد غرضم

Ки баради ҷавҳар ва наад арзам

که بَرَد جوهر و نهد عَرَضم

Сустии орад ба дараки мо фарзам

سستی آرد به درکِ ما‌فَرضم

Коҳад аз сиҳҳат ва даҳ маразам

کاهد از صحت و دهد مرضم

Ҷой иқбол оварад идбор

جایِ اقبال، آورد ادبار

Хоҳам аз онмиӣ ки карда худо

خواهم از آن مِیی که کرده خدا

Васф ӯро ба лайлаи алосрӣ

وصفِ او را به «لیلةُ‌الاسریٰ»

Орифу омӣ аз тариқи вафо

عارف و عامی از طریقِ وفا

Кард тафсир ӯ худо ба худо

کرد تفسیر، او خدا به خدا

Ба май ҳуби ҳайдари каррор

به مِیِ حُبِّ حیدرِ کرار

Иллати ғоӣии ҷаҳони вуҷӯд

علتِ غائیِ جهانِ وجود

Мояи эътибор буд ва набӯд

مایهٔ اعتبارِ بود و نبود

Ҳар вуҷӯдии зи ҷӯад ӯ мавҷӯд

هر وجودی ز جودِ او موجود

Бандаи поки ҳазрати маъбуд

بندهٔ پاکِ حضرتِ معبود

Васии хоси Аҳмади мухтор

وصیِ خاصِ احمدِ مختار

Чамани орои гулшани ваҳоб

چمن‌آرایِ گلشنِ وهاب

Зинати афзои минбару миҳроб

زینت‌افزایِ منبر و محراب

Шарафи хоку боду оташу об

شرفِ خاک و باد و آتش و آب

Боиси рутбаи аўлўои алолбоб

باعثِ رتبهٔ اولوا الالباب

Мардуми дидаи аўлўоолобсор

مردمِ دیدهٔ اولوا الابصار

Мавҷи дарёии қудрати аҳадӣ

موجِ دریایِ قدرتِ احدی

Самари нахли ҳайати самадӣ

ثمرِ نخلِ هیئتِ صمدی

Намат хон неъмати абадӣ

نعت‌ِ خوانِ نعمتِ ابدی

Тӯҳфаи зокёти лами илдӣ

تحفهٔ زاکیاتِ «لم یلدی»

Боди доим ба онҷноби нисор

باد دائم به آن جناب، نثار

эй вале худо худоӣ кун

ای ولیِ خدا! خدایی کن

Яъне аз ғайби худ намое кун

یعنی از غیب، خودنمایی کن

Дар ҷаҳони кор кибриёе кун

در جهان کارِ کبریایی کن

Аз муҳибони гиреҳ гушойӣ кун

از محبان گره‌گشایی کن

Рӯбаҳон ҷумла гашта шери шикор

روبهان جمله گشته شیرِ شکار!

Карбало бар ҳусайнат эй сарвар

کربلا بر حسینت ای سَرور!

Танг шуд он қадари рҷўри қадар

تنگ شد آن‌قدر ز جورِ قَدر

Ки лаби хушк бо ду дида тар

که لبِ خشک با دو دیدهٔ تر

Шуд зи шамшери шари дун бе сар

شد ز شمشیرِ شِمرِ دون، بی‌سر

Додраси баҳр вай набад диёр

دادرس بهرِ وی نبُد دیار

Ҳарчӣ гуфт эй ситамгарони раҳмӣ

هر چه گفت: ای ستمگران! رحمی

Май даҳуми баҳри оби ҷони раҳмӣ

می‌دهم بهرِ آب، جان؛ رحمی

Кас чу ман нест дар ҷаҳони раҳмӣ

کَس چو من نیست در جهان، رحمی

Ки ба душмани баради амони раҳмӣ

که به دشمن بَرَد امان، رحمی

Санг хӯн гиряд аз чунин гуфтор

سنگ، خون گرید از چنین گفتار

Лек бар шимур дун накард асарӣ

لیک بر شمرِ دون نکرد اثری

Гарчи оҳаш бсухт ҳар ҷгарӣ

گرچه آهش بسوخت هر جگری

ё алигар ту доштӣ хабарӣ

یا علی! گر تو داشتی خبری

Ҳамчу ( сомит ) мудоми навҳа гарӣ

همچو «صامت» مدام نوحه‌گری

Буд кори ту то ба рӯзи шумор

بود کارِ تو تا به روزِ شمار