Рӯзи эҷод ки ҳақи хилқат дунё ме кард
روز ایجاد که حق خلقت دنیا میکرد
Дар пас пардаи алӣ буд тамошо ме кард
در پس پرده علی بود تماشا میکرد
Балки аз оина кант набиё чу набӣ
بلکه از آینه کنت نبیا چو نبی
Сайр дар оби гули одам ва ҳавво ме кард
سیر در آب گِل آدم و حوا می کرد
Буд сари манзили одам ба шабистони адам
بود سرمنزل آدم به شبستان عدم
Ки ду то қдрсо дар бар якто ме кард
که دو تا قد رسا در بر یکتا میکرد
Гуҳари поки ваии андари садафи илми илоҳ
گهر پاک وی اندر صدف علم اله
Машқи омухтани ҳикмат ашё ме кард
مشق آموختن حکمت اشیاء میکرد
Ба хиёбони ҷинони сайр аҳбо ме дод
به خیابان جنان سیر احبا میداد
Баҳри кайфари бсқри манзил аъдо ме кард
بهر کیفر به سقر منزل اعداء میکرد
Ёд медод раҳу расми иёдат ба малик
یاد میداد ره و رسم عبادت به ملک
Чун ба тмҳиди худои дарҷи даҳан во ме кард
چون به تمحید خدا دُرج دهن وا میکرد
Ёвари дайни аҳад буд муайяни Аҳмад
یاور دین احد بود معین احمد
Ҳар куҷо рӯй ба бозуӣ тавоно ме кард
هر کجا روی به بازوی توانا میکرد
Рӯзро рӯзи азо дар бар чашми кофар
روز را روز عزا در بر چشم کافر
Тирау тор ба мисли шаб ялдо ме кард
تیره و تار به مثل شب یلدا میکرد
Зулфиқори ду дамаш аз раги шарёни аду
ذوالفقار دو دمش از رگ شریان عدو
Даштро сар ба сар аз мавҷ чу дарё ме кард
دشت را سر به سر از موج چو دریا میکرد
Ба дараш дидаи умеди ма гардун дошт
به درش دیده امید مه گردون داشت
зи Рахши касби зиёи байза Байзо ме кард
ز رُخش کسب ضیاء بیضه بیضا میکرد
Баҳри айтому аромли шабу рӯзу мау сол
بهر ایتام و ارامل شب و روز و مه و سال
Вақфи осоишашони ранҷи сар ва по ме кард
وقف آسایششان رنج سر و پا میکرد
Кош дар ёрии фарзанди ғарибаши зи Наҷаф
کاش در یاری فرزند غریبش ز نجف
Як замонӣ ба сафи крбу бало ҷо ме кард
یک زمانی به صف کربوبلا جا میکرد
Андари он дам ки срсинаҳи дилбанди расӯл
اندر آن دم که سر سینه دلبند رسول
Шимур бевоҳима меомад ва моўӣ ме кард
شمر بی واهمه میآمد و ماًوی میکرد
ё алии соқии кавсари ту ва аз шимури ҳусайн
یا علی ساقی کوثر تو و از شمر، حسین
Қатраи обии блби ташна таманно ме кард
قطره آبی بهلب تشنه تمنا میکرد
Бе касе байн ки бензади писари саъди палид
بیکسی بین که بهنزد پسر سعد پلید
Илтимоси шаҳи дайни духтар Заҳро ме кард
التماس شه دین دختر زهرا میکرد
Шимури ханҷар ба гулӯии шаҳи лаби ташнаи ниҳод
شمر خنجر به گلوی شه لب تشنه نهاد
Зайнаби ғмздаҳ бо гиря тамошо ме кард
زینب غمزده با گریه تماشا میکرد
Ҳар итмии шарари шуълааш андари доман
هر یتمی شرر شعلهاش اندر دامن
Рӯй аз хаймаи саросема ба саҳро ме кард
روی از خیمه سراسیمه به صحرا میکرد
Чодари он як зи сари зайнаб бекас май барад
چادر آن یک ز سر زینب بیکس میبرد
Ва он дигар рӯ ба ҳарам аз пай яғмо ме кард
و آن دگر رو به حرم از پی یغما میکرد
Кард хўлӣ чу сари хусрави дайни зеби танур
کرد خولی چو سر خسرو دین زیب تنور
Кош аз дӯди дили Фотима парво ме кард
کاش از دود دل فاطمه پروا میکرد
Баради сайлоби фанои хирмани сабр ( сомит )
برد سیلاب فنا خرمن صبر (صامت)
Андари он рӯз ки ин марсия иншо ме кард
اندر آن روز که این مرثیه انشاء میکرد