Ҳар киро файзи азал аз бахт бархӯрдор кард

هر که را فیض ازل از بخت برخوردار کرد

Ҷой дар зилли ливои ҳайдар каррор кард

جای در ظل لوای حیدر کرار کرد

Мазҳари алтофи яздони қиблаи имкони алӣ

مظهر الطاف یزدان قبله‌ی امکان، علی

Онкии ҳақ ӯро муайяни Аҳмад мухтор кард

آنکه حق او را مُعِین احمد مختار کرد

Он ки андари нусрати исломи рӯзи корзор

آن که اندر نصرت اسلام، روز کارزار

Рӯзро чун шаб ба чашми лашгар куффор кард

روز را چون شب به چشم لشگر کفار کرد

Он ки шуд гардони грдонкш ба теғи ваии залил

آنکه شد گُردانِ گردنکش به تیغِ وی ذلیل

Онкии ибоди вснро то қиёмат хор кард

آنکه عُبّادِ وَثَن را تا قیامت خوار کرد

Муқтадои хокёни шоҳӣ ки хоки пой ӯ

مقتدای خاکیان شاهی که خاک پای او

Дасти қудрати серумаи чашм аўлўолобсор кард

دست قدرت سرمه چشم اولوالابصار کرد

Баради Амри ъбдўдро теғи вай бар хоки марг

برد عمرو عبدود را تیغ وی بر خاک مرگ

Чашми мрҳбро зи хоби саркашӣ бедор кард

چشم مرحب را ز خواب سرکشی بیدار کرد

Ҳаст аҳёкрдни амвоти кори кирдигор

هست احیا کردنِ اموات، کارِ کردگار

эй аҷаби коншоаҳ аз ин корҳо бисёр кард

ای عجب کآن شاه، از این کارها بسیار کرد

Бо дам шамшер барон ва ба самсоми забон

با دم شمشیر بران و به صمصام زبان

Аз хасу хошоки роҳи шаръро ҳамвор кард

از خس و خاشاک راه شرع را هموار کرد

Дард бадбахтӣ бибин кори санояш дар ғадир

دردِ بدبختی ببین، کارِ ثنایش در غدیر

Онкии бах бах гуфт қавли хешро инкор кард

آنکه «بَخّ بَخّ» گفت، قولِ خویش را انکار کرد

Инчунин пиндошт каз тдлису талбиси вҳил

اینچنین پنداشت کز تدلیس و تلبیس و حیل

наметавонад нури ҳақи хомӯш аз ин рафтор кард

می‌تواند نور حق خاموش از این رفتار کرد

Хуб ҷое рафт охир аз таассуби вақти марг

خوب جایی رفت آخر از تعصب وقت مرگ

Ихтиёри норро баҳри дафъ ор кард

اختیار نار را بهر دفع عار کرد

Оқибати тухми нифоқии кишт то рӯзи ҷазо

عاقبت تخمِ نفاقی کِشت تا روزِ جزا

Халқро гумроҳ аз он бдхти каҷ рафтор кард

خلق را گمراه، از آن بدبختِ کج‌رفتار کرد

Дафтари иршодро печид дар як сӯи ниҳод

دفترِ ارشاد را پیچید و در یک سو نهاد

Чун зи кини ғасби фадак аз итрат атҳор кард

چون ز کین، غصبِ فدک از عترتِ اطهار کرد

Аҳли туғёнро аз ин рафтор шавам нописанд

اهلِ طغیان را از این رفتارِ شومِ ناپسند

Он ғализ ! лақаб бо авлоди Сафён ёр кард

آن غلیظ‌القلب، با اولادِ سفیان یار کرد

То ҳусайни ташнаи лабро аз ватани овораи сохт

تا حسینِ تشنه‌لب را از وطن آواره ساخت

Баради вондри Карбалоеи ёр ва беансор кард

بُرد و اندر کربلا، بی‌ یار و بی‌انصار کرد

То ҳусайни ташнаи лабро аз ватани овораи сохт

در کنارِ مُلتقی‌البحرین، شاهِ تشنه را

Брдўондри Карбалоеи ёр ва беансор кард

از قفا بی‌سر، ز نوکِ خنجرِ خونخوار کرد

Дар канори милтиқии албҳрини шоҳи ташна ро

آنقدر بارِ ستم بر دوشِ زینب بار ساخت

Аз қафо бе сари зи нӯки ханҷар хунхор кард

کآن ستمکش را ز دستِ زندگی بیزار کرد

ӣнқадари бори ситам бар дӯши зайнаби бори сохт

پیشِ چشمش جسمِ مجروحِ حسین چون توتیا

Кони стмкшро зи дасти зиндагӣ безор кард

روزگار آخر ز سُمِّ توسنِ اشرار کرد

Пеши чашмаши ҷисми маҷрӯҳи ҳусайн чун тўтё

از غمِ بی‌دستیِ عباس، خَم همچون هلال

Рӯзгори охири зи сами тавсан ашрор кард

قامتِ کلثوم، دل‌پرخونِ بی‌غم‌خوار کرد

Аз ғам бе дастии аббоси хам ҳамчун ҳилол

با سفارش‌هایِ پیغمبر به اطفالِ یتیم

Қомати кулсуми дили пурхӯн беғам хор кард

شمر، اولادِ حسین را بی‌سبب آزار کرد

Бо сифоришҳои пайғамбар ба атфоли ятем

یعنی اندر خیمه‌گاهِ شاهِ‌دین، آتش نهاد

Шимури авлоди ҳусайнро бесабаб озор кард

خوار و نالان، کودکانش را به رویِ خار کرد

Яъне андари химгоаҳи шоҳидин оташи ниҳод

ساخت خولی، رأسِ پُرخونِ حسین خاکستری

Хору нолони кӯдаконашро ба рӯй хор кард

خوب مهمانی زِ سِبطِ سیدِ ابرار کرد

Сохт хўлии раси пурхӯни ҳусайни хокистарӣ

اُف به دور دهرِ دون‌پرور، که زینب عاقبت

Хуби меҳмонии зи сибти Сайид Аброр кард

سر برهنه رو به سویِ کوچه و بازار کرد

Ов бадрӯд ҳар дунпарвар ки зайнаби оқибат

یا علی! ای غیرت‌الله، دخترت را روزگار

Сари бараҳнаи рӯ ба сӯии кӯча ва бозор кард

واردِ بزمِ یزیدِ کافرِ غدّار کرد

ё алӣ эй ғайрати аллоҳи духтаратро рӯзгор

بس‌که از هر سو، غم و ماتم به «صامت» رو نهاد

Вориди базми язиди кофар ғаддор кард

سر به زیرِ پَر، ز محنت همچو بوتیمار کرد