Дар лавҳ чун қалам ба сухан ибтидо намӯд
در لوح، چون قلم به سخن ابتدا نمود
Дебочаро ба мадҳи шаҳ авлиё намӯд
دیباچه را به مدحِ شهِ اولیا نمود
Шоҳӣ ки сохт сафи ъдўқоъи сФсФо
شاهی که ساخت صفِ عدو، قاعِ صَفصَفا
Ҳар ҷо ки рӯ биоварӣ Мустафо намӯд
هر جا که رو به یاوریِ مصطفی نمود
Бар ҷои ниҳоди кашфи ғторо яқини вай
بر جا نهاد «کشفِ غطا» را یقینِ وی
Аз бас ки дар баҳори маориф шино намӯд
از بس که در بِحارِ معارف شنا نمود
Мумкин набӯд рӯяти воҷиб аз ин сабаб
ممکن نبود رؤیتِ واجب، از این سبب
ӯро худои ойинаи ҳақ намо намӯд
او را خدای، آیینهیِ حقنما نمود
Додаш худои зи илми ладуннии бадали фурӯғ
دادش خدا ز علمِ لدنّی به دل فروغ
Пас бар тамоми гумшудагон раҳнамо намӯд
پس بر تمامِ گمشدگان رهنما نمود
Зад зарбатӣ ба тораки мрҳб ки то сқр
زد ضربتی به تارکِ مَرحب که تا سقر
Ҳаии тохт бо ду асбаи вҳӣ марҳабо намӯд
هی تاخت با دو اسبه و هی مرحبا نمود
То чун кулем рўмзи ҷуҳудон чу шаб кунад
تا چون کلیم، روزِ جهودان چو شب کند
Сбобаҳро ба кандан дар чун Асо намӯд
سبّابه را به کندنِ در، چون عصا نمود
Баҳри субути маънии ало ба зулфиқор
بهرِ ثبوتِ معنیِ «الّا»، به ذوالفقار
Эҳёу аҳли ширк ба тасвир ло намӯд
امحای اهلِ شرک به تصویرِ «لا» نمود
Қисоми хулду нор ки пеш аз сафи шумор
قسّامِ خُلد و نار، که پیش از صفِ شمار
Аз ҳам биҳишту дӯзахёнро сўо намӯд
از هم بهشت و دوزخیان را سوا نمود
Поси шариъати набавиро нигоҳ дошт
پاسِ شریعتِ نبوی را نگاه داشت
Баъд аз набии босам банӣ иктифо намӯд
بعد از نبی به اسمِ نبی اکتفا نمود
Вар на сегӣ ки буд палид кам аз занӣ
ورنه سگی که بود پلیدِ کماز زنی
Кӯи иддаои мансаби шер худо намӯд
کو ادعایِ منصبِ شیرِ خدا نمود
Ҳаркаси бчори муваҷҷаҳи дард ва бало фитод
هر کس به چهار موجهیِ درد و بلا فتاد
Баҳри наҷоти худ бълӣ илтиҷо намӯд
بهرِ نجاتِ خود به علی التجا نمود
Ёллъҷб ки бо ҳама қудрат намӯд сабр
یاللعجب که با همه قدرت، نمود صبر
То шимури ин қадар ба ҳусайнаш ҷафо намӯд
تا شمر، این قدر به حسینش جفا نمود
Мазлӯму ташнаи кому дили афсурдау ғариб
مظلوم و تشنهکام و دلافسرده و غریب
Бо ханҷар аз ҷафои сар ӯро ҷудо намӯд
با خنجر از جفا سرِ او را جدا نمود
Дар пеши чашми зайнаби маҳзуни дили кабоб
در پیشِ چشمِ زینبِ محزونِ دلکباب
Аз сами асби ҷисми ҳусайн тўтё намӯд
از سُمِّ اسب، جسمِ حسین توتیا نمود
Беғусл ва бе кафани бадани сибти Мустафо
بیغسل و بیکفن، بدنِ سبطِ مصطفی
Урён ба рӯй хок ба крббло намӯд
عریان به رویِ خاک، به کربوبلا نمود
Дӯд аз хайёми ол набӣ рафт то сипеҳр
دود از خیامِ آلِ نبی رفت تا سپهر
Зон оташӣ ки шимури ситамгар ба по намӯд
زان آتشی که شمرِ ستمگر به پا نمود
Беморро савор шутур кард ва бе ҷҳоз
بیمار را سوارِ شتر کرد و بیجهاز
Алҳақ аҷаби риояти зин алъбо намӯд
الحق عجب رعایتِ زینالعبا نمود
Рухсор ӯ зи зарбати силӣ кабоб кард
رخسارِ او ز ضربتِ سیلی، کباب کرد
Ҳар ҷои сакинаи замзама ё або намӯд
هر جا سکینه زمزمهیِ «یا ابا» نمود
Он рӯз шаҳ бидида зайнаби ҷаҳони сиёҳ
آن روز شد، به دیدهیِ زینب، جهان سیاه
Кандар хароба бо дили афсурда ҷо намӯд
کاندر خرابه، با دلِافسرده جا نمود
Дармаҷлиси язид чу бинишаст бе ҳиҷоб
در مجلسِ یزید چو بنشست بیحجاب
Аз ғуссаи марги хеши талаб аз худо намӯд
از غصه، مرگِ خویش طلب از خدا نمود
То бештар занад бадали ваии шарари язид
تا بیشتر زند به دلِ وی شرر، یزید
Чӯби ситами блъли ҳусайн ошно набӯд
چوبِ ستم به لعلِ حسین آشنا نمود
( сомит ) ба мотами шаҳи дайн буд навҳа гар
«صامت» به ماتمِ شهِ دین بود نوحهگر
То аз ҷаҳон мақом бидор бақо намӯд
تا از جهان، مُقام به دارِ بقا نمود