Гар алии баъд аз набӣ бар муъминон мавло набӯд
گر علی بعد از نبی بر مؤمنان مولی نبود
Исмӣ аз ислом ва аз исломён барпо набӯд
اسمی از اسلام و از اسلامیان برجا نبود
Гар ниФшрдӣ ба ҳифзи байзаи исломи пой
گر نیفشردی به حفظِ بَیضهی اسلام پای
Номӣ аз шаръу шариъат токунӯн Аслан набӯд
نامی از شرع و شریعت تاکنون اصلا نبود
Гар намеафрӯхт аз баҳри шикасти хасми даст
گر نمیافروخت از بهرِ شکستِ خصم، دست
Ҳақи парастӣ дар тамоми мосўӣ пайдо набӯд
حقپرستی در تمامِ ماسوی پیدا نبود
Дафъи куффори арабро кард шамшери каҷаш
دفعِ کفارِ عرب را کرد شمشیرِ کجش
Варна роҳи рости андари йени ҳақ бар ҷо набӯд
ورنه راهِ راست اندر دینِ حق، برجا نبود
наменабӯд осорӣ аз молоирӣу моирӣ
مینبود آثاری از «ما لایُریٰ» و «ما یُریٰ»
Зоти покашгар ғараз аз хилқат ашёъ набӯд
ذاتِ پاکش گر غرض از خلقتِ اشیاء نبود
Офтобу осмону курсӣу лавҳу қалам
آفِتاب و آسِمان و کُرسی و لوح و قلم
Аршу фарз ва ҳастӣу дунё ва моФиҳо набӯд
عرش و فرش و هستی و دنیا و مافیها نبود
Шуд зи насли одаму ҳаввои ҳувайдои насли вай
شد ز نسلِ آدم و حوّا هویدا نسلِ وی
Венаи аҷаб гаравӣ набӯдӣ одам ва ҳавво набӯд
وین عجب، گَر وی نبودی، آدم و حوّا نبود
Нӯҳу иброҳӣму Илёсу Шуайбу Хизру ҳуд
نوح و ابراهیم و الیاس و شعیب و خضر و هود
Юсуфу ёқӯбу луту Мӯсо ва исо набӯд
یوسف و یعقوب و لوط و موسِی و عیسی نبود
Гар накардӣ тарбияти аслоб ё арҳом ро
گر نکردی تربیت، اصلاب یا ارحام را
Феълии андари ИМАоту файзӣ аз обо набӯд
فعلی اندر امّهات و فیضی از آبا نبود
Нӯки шамшераши ҳадис аз лоами алиф ло ме кунад
نوکِ شمشیرش حدیث از لام و الف، «لا» میکند
Яъне аз теғаш набӯдӣ ҳарфӣ аз ало набӯд
یعنی ار تیغش نبودی، حرفی از «الّا» نبود
Ҳилли ?утиро ҷузи ҳадис вай набад шани нузул
«هلاتیٰ» را جز حدیثِ وی نَبُد شأنِ نزول
Қул тъолўоро ба ғайр аз наси вай маънӣ набӯд
«قل تعالَوا» را به غیر از نصِّ وی معنا نبود
намесазад ӯро « слўнӣ » дар минбар на онк
میسزد او را «سلونی» در منبر، نه آنکْ
Маънии ҳарфии зи қуръони худо доно набӯд
معنیِ حرفی ز قرآنِ خدا دانا نبود
Онкиро лӯлои алии бади умдаи асбоби кор
آنکه را «لولا علی» بُد عمدهی اسبابِ کار
Дар хилофати лоиқи ин даъвӣ беҷо набӯд
در خلافت، لایقِ این دعویِ بیجا نبود
эй паноҳ бепаноҳон ё алӣ дар Карбало
ای پناهِ بیپناهان یا علی! در کربلا
Гар ту будӣ дар бар душмани ҳусайн танҳо набӯд
گر تو بودی، در بَرِ دشمن، حسین تنها نبود
Соқии кавсари туу баҳри лаби хушки ҳусайн
ساقیِ کوثر تو و، بهرِ لبِ خشکِ حسین
Қатраи обӣ дар заволи зуҳр ошуро набӯд
قطره آبی در زوالِ ظهرِ عاشورا نبود
Ҳеҷ ломазҳаб накушта миҳмонро ташнаи лаб
هیچ لامذهب نکُشته میهمان را تشنهلب
Худ гирифтам коби меҳри модараш Заҳро набӯд
خود گرفتم کآب، مَهرِ مادرش زهرا نبود
Кӣ кунад раси мусулмонро мусулмон бар синон
کی کند رأسِ مسلمان را مسلمان بر سِنان؟
Дар бар габру насорои ин амал зебо набӯд
در بَرِ گَبْر و نصاریٰ، این عمل زیبا نبود
Он тани нозук ки шуд аз наъли асбони тўтё
آن تنِ نازک که شد از نعلِ اسبان، توتیا
Зеби оғӯши набӣу Сайид бтҳо набӯд
زیبِ آغوشِ نبی و سیدِ بطحا نبود؟
Он сиррӣ кандар бар ҳақ буд доим дар суҷуд
آن سری کاندر بَرِ حق بود دایم در سجود
Рӯй хокистар ба кунҷи матбах ӯро ҷо набӯд
رویِ خاکستر به کنجِ مطبخ، او را جا نبود
Оли тоҳоро кашӣдан ҷониби базму шароб
آلِ طه را کشیدن جانبِ بزم و شراب
Дархури чӯб язид шавам бепарво набӯд
درخورِ چوبِ یزیدِ شومِ بیپروا نبود
Он набӣ казуӣ садои савт қуръон шуд баланд
آن لبی کز وی صدایِ صوتِ قرآن شد بلند
Хуши намо дар пеши чашми кофар ва тарсо набӯд
خوشنما در پیشِ چشمِ کافر و ترسا نبود
Монадгар ин маҳшари азмӣ ба олами нотамом
ماند اگر این محشرِ عظمیٰ به عالم ناتمام
Беш аз ин дигар ( ба сомит ) тоқат иншо набӯд
بیش از این دیگر به «صامت»، طاقتِ اِنشا نبود