Ҳудҳуди боди баҳорӣ ба чаман гашт бурид
هدهدِ بادِ بهاری به چمن گشت بَرید
Кӯ ба бурҷи ҳамл аз ҳут қадам зад хуршед
کو به برجِ حَمَل از حوت قدم زد خورشید
Ваа аз ин рӯз ки монанди наврӯз
وَه از این روز که به مانند نوروز
Ҷо бовар нак тараби сохтаи аи Ямани се ид
جا به اورنگِ طرب ساخته از یُمن سه عید
Соқиои соғар май даҳ ки ба тарафи саҳро
ساقیا ساغرِ مِی ده که به طرفِ صحرا
Мавсими сайри гулу соя бедаст ва набед
موسمِ سیرِ گل و سایهیِ بید است و نبید
Се иди мутаволӣ ба яке рӯзи аён
سه عیدِ متوالی به یکی روز عیان
Ки бурун аз ҳад ва ъад ҳар се шарифанду Саид
که برون از حد و عد، هر سه شریفند و سعید
Иди наврӯз ва дигар ҷумъаи ваъиди азҳӣ
عیدِ نوروز و دگر جمعه و عیدِ اضحیٰ
Чашми офоқ ба фирӯзии ин рӯз бурид
چشمِ آفاق به فیروزیِ این روز بَرید
Иди азҳии зи фидо омадан аз баҳри забеҳ
عیدِ اضحیٰ ز فدا آمدن از بهرِ ذبیح
Карда ташрифи шарофати бабр аз ҳии Маҷид
کرده تشریفِ شرافت به بَر از حیِّ مجید
Шарафи ҷумъаи муқарар шуда аз рӯзи азал
شرفِ جمعه مقرر شده از روزِ ازل زِ پیِ عیدِ محبانِ محمد زِ حمید
зи паии иди муҳибони Муҳамади зи ҳамид
زِ پیِ عیدِ محبانِ محمّد زِ حمید
Сабаби шодии наврӯз на танҳо ин аст
سببِ شادیِ نوروز نه تنها این است
Кон дарав карда баннои ҷашни аҷам аз ҷамшед
کآن در او کرده بنا جشنِ عجم از جمشید
Анбиёӣамам собиқаи андар ҳар қарн
انبیایِ اُممِ سابقه، اندر هر قرن
Карда наврӯзи аҷамро ба тамомии тамҷид
کرده نوروزِ عجم را به تمامی تمجید
Ҳар китобӣ ки зи яздон ба замин карда нузул
هر کتابی که ز یزدان به زمین کرده نزول
Андрў дода худованд аз ин рӯзи навид
اندر او داده خداوند از این روز نوید
Кибриёи сохта дар ҳурмати ин иди шариф
کبریا ساخته در حُرمتِ این عیدِ شریف
Ба расӯли арабии Аҳмади уммии таъкид
به رسولِ عربی، احمدِ اُمّی تأکید
Андарин иди накӯи тарҷумаи ҷоء алҳақ
اندرین عیدِ نکو، ترجمهیِ «جاءَ الحَق»
Ба сно дид ҷаҳони пер ва ҷавон гашта падед
به صنادیدِ جهان، پیر و جوان گشته پدید
Баъди пайғамбари акрам ки срирослом
بعدِ پیغمبرِ اکرم که سریرِ اسلام
Шуд мулаввас ба тақозои фасоди се палид
شد مُلَوث به تقاضایِ فسادِ سه پلید
Сари макнуни худои сҳри набии завҷи батул
سرِّ مکنونِ خدا، صِهرِ نبی، زوجِ بتول
Ба хилофат илм афрохт пас аз иди баъӣд
به خلافت عَلَم افراخت پس از عیدِ بعید
Ғозаи тозаи имрӯз ба рухсораи шаръ
غازهیِ تازه امروز به رخسارهیِ شرع
Чу нави зўӣист ки баъд аз се ҳдс шуд таҷдид
چو وضوئیست که بعد از سه حَدَث شد تجدید
Буд вайрон агар арқони ҳидоят ғам нест
بود ویران اگرَ ارکانِ هدایت، غم نیست
Ки аён низ маъаттал шуда бо қасри машйад
که عیان نیز معطل شده با «قصرِ مَشید»
Сар « акмалати лаками динкм » аз қавли худо
سرِّ «اَکمَلتُ لَکُم دینَکُم» از قولِ خدا
Гашт « алиўм » аёни пеши мўолӣу убайд
گشت «اَلیوم» عیان پیشِ موالی و عبید
Муддаиро агар инкор буд гӯ бар хон
مدعی را اگر انکار بُوَد، گو برخوان
зи набии маънӣ « қидмати аликм » бўъид
زِ نبی معنیِ «قَدَّمتُ اِلَیکُم بالوَعید»
Ақлро сози ҳукми такя ба ақвол макун
عقل را ساز حَکَم، تکیه به اقوال مکن
Ки фулонӣ чаҳ навиштааст ба шарҳи таҷред
که فلانی چه نوشتهست به «شرحِ تجرید»
Бояд аз тақвияти ақли барии пай ба усӯл
باید از تقویتِ عقل، بَری پِی به اصول
На ба унвони таассуб на ба таври тақлид
نه به عنوانِ تعصب، نه به طورِ تقلید
Мқтдобўдни мФзўл ба фозил ғалат аст
مقتدا بودنِ مَفضول به فاضل، غلط است
Ба худоӣ ки буд ақрби ман ҳабл варед
به خدایی که بُوَد «اَقربِ مِن حبلِ وَرید»
ё алӣ эй ки муъаллақ ба влои ту буд
یا علی! ای که معلّق به وَلایِ تو بُوَد
Кори пайғамбарӣу маънии алӣу тавҳид
کارِ پیغمبری و معنیِ عدل و توحید
Ҳубу буғзи ту буд боиси хулду нирон
حُبّ و بُغضِ تو بُوَد باعثِ خُلد و نیران
Амр ва наҳй ту буд кашфи яқину тардид
امر و نهیِ تو بُوَد کشفِ یقین و تردید
Санади тест ба исботи хилофати як як
سندت هست به اثباتِ خلافت یکیک
Суҳуфи аҳди атиқу кутуби аҳди ҷадид
صُحفِ عهدِ عتیق و کتبِ عهدِ جدید
Нест ҷузи пайравии амри ту бахти масъӯд
نیست جز پیرویِ امرِ تو بختِ مسعود
Нест ҷузи доштани меҳри ту айши ҷовид
نیست جز داشتنِ مِهرِ تو عیشِ جاوید
Чаҳ кунад бо асари марҳаматат рӯй сиёҳ
چه کند بی اثرِ مرحمتت «رویِ سیاه»؟
Чаҳ кунад бо адами мағфиратати рӯзи сифед
که کند با عدمِ مغفرتت «روی سفید»؟
Бағам ҳар ду ҷаҳони ҷазбаи лутфи мифтоҳ
به غمِ هر دو جهان، جذبهیِ لطفت مفتاح
Баҳри озодии кунин атои ту калид
بهر آزادیِ کونین، عطایِ تو کلید
Кандан аз меҳри ту дили маънии ширку илҳод
کندن از مِهرِ تو دل، معنیِ شرک و الحاد
Рафтани роҳи ту сармояи садиқу шаҳид
رفتنِ راهِ تو، سرمایهیِ صدّیق و شهید
Шурби аҳбоби ту дар хлдри ҳиқи махтум
شُربِ احبابِ تو در خُلد، «رَحیقِ مَختوم»
Акли аъдои ту дар ҳоўиаҳи зи қавм ва садед
اَکلِ اعدایِ تو در هاویه، «زَقّوم و صَدید»
Суханат дар дили душман чу дили афъӣу заҳр
سُخنت در دلِ دشمن، چو دَمِ افعی و زهر
Дар дили дӯст чу батни садафу марворид
در دلِ دوست، چو بطنِ صدف و مروارید
Илми қуръони зи ту аз феълу асомӣу ҳуруф
علمِ قرآن ز تو، از فعل و اسامی و حروف
Фарқи фарқони зи ту аз фатҳу касру ташдид
فرقِ فرقان ز تو، از فتحه و کسر و تشدید
Ту ба анвори ҳақиқат ба шариъати ҳомӣ
تو به انوارِ حقیقت، به شریعت حامی
Ту ба аҳкоми набуввати зи вилояти таъйид
تو به احکامِ نبوت، ز ولایت تأیید
Сафи теғи туро сохтаи қуръони возеҳ
صفتِ تیغِ تو را ساخته قرآن واضح
Мбтдо назул ҳадиду хабараши ёси шадид
مُبتدا «نَزَّلَ حَدید» و خبرش «بأسٌ شَدید»
Срўрои догаро ( сомит ) омӣ чаҳ кунад
سَروَرا! دادگَرا! «صامتِ» عامی چه کند؟
Умр дар кӯтаҳӣу мадҳати мадҳи ту мадид
عُمر در کوتهی و مدحتِ و مدحِ تو مَدید
Нест Қоонӣу хоқонӣу ҳисону сҳиб
نیست قاآنی و خاقانی و حسّان و صُهَیب
Нест Фирдавсии тӯсӣу манӯчеҳри валид
نیست فردوسیِ طوسی و منوچهر و لَبید
Ки ба таҳсини ман аз давлати маддоҳии ту
که به تحسینِ من، از دولتِ مداحیِ تو
Лаб гушойанд ба шукри нъм раб маъаед
لب گشایند به شکرِ نِعَمِ «ربِّ مُعید»
То буд маркази меҳри фалакии чархи асир
تا بُوَد مرکزِ مِهرِ فلکی «چرخِ اَثیر»
То кунад мутрибии олами алавии ноҳид
تا کُند مطربیِ عالمِ عُلوی «ناهید»
Лаби аҳбоби ту хандони зи тнъм чун гул
لبِ احبابِ تو خندان ز تَنَعُّم، چون گل
Дили аъдодии ту ларзони зи тазалзул чун бед
دلِ اعدایِ تو لرزان ز تَزَلزُل، چون بید