Бояд эй хома бипардохт зи нави дафтари дигар
باید ای خامه بپرداخت ز نو دفتر دیگر
То басар бар нуҳум аз мадҳи алии афсари дигар
تا بهسر بر نهم از مدحِ علی، افسر دیگر
Ҳуҷҷати болиғаи эзади манон ки бкбҳон
حجتِ بالغهیِ ایزدِ منان که به گیهان
Нест аснии ъушриро ба ҷуз ӯ сарвари дигар
نیست اثنی عشری را به جز او سَرورِ دیگر
Изни воъиаҳи ҳақи васии Аҳмади ?маккей
اُذُنِ واعیهیِ حق، وصیِ احمدِ مکی
Ки нбдхтми русулро ба ҷуз ӯ ёвари дигар
که نَبُد ختمِ رسل را به جز او، یاور دیگر
Шавҳари духтари пайғамбари хотам ки ба олам
شوهرِ دخترِ پیغمبرِ خاتم که به عالم
Баҳри ин завҷа ва он завҷ набад ҳамсари дигар
بهرِ این زوجه و آن زوج نَبُد همسر دیگر
Аввалин матлаъу дебочаи хилқат ки набошад
اولین مطلع و دیباچهیِ خلقت که نباشد
Ба улӯми набавии ғайри ҷанобаш дар дигар
به علومِ نبوی غیرِ جنابش درِ دیگر
Талъат парда нишин самади лами излӣ ро
طَلعتِ پرده نشینِ صمدِ لمیزلی را
Нест дар кишвари имкон ба аз ӯ мазҳари дигар
نیست در کشورِ امکان به از او مظهر دیگر
Ба ҳама халқ бигӯед зи ҳафтод ва ду мнсб
به همه خلق بگویید ز هفتاد و دو مذهب
Ки маро нест ба ҷузи шери худои раҳбари дигар
که مرا نیست به جز شیرِ خدا رهبرِ دیگر
Бскаҳ дидам зи алии кори худоӣ ва шунидам
بس که دیدم ز علی کارِ خدایی و شنیدم
Бскаҳ ҳар лаҳза аён шуд Рахш аз манзари дигар
بس که هر لحظه عیان شد رُخش از منظر دیگر
Шуда наздик кунам куфр ба ақволи насирӣ
شده نزدیک کنم کفر به اقوالِ نصیری
Халқи гирам ки шуморанд марои кофари дигар
خلق گیرم که شمارند مرا کافرِ دیگر
ё алӣ аз чаҳ накардӣ гузарии сӯии ҳусайнат
یا علی از چه نکردی گذری سویِ حسینت؟
Он замони кӯи нбдши ғайри худои ёвари дигар
آن زمان کو نَبُدش غیرِ خدا یاورِ دیگر
Ба замини суд ҷабин гуфт вай аз гуфта ҷўдӣ
به زمین سود جبین، گفت وی از گفتهیِ «جودی»
Кош май буд маро бар тани хунини сари дигар
«کاش میبود مرا بر تنِ خونین سرِ دیگر»
Лаби аташону дили сӯхтау дидаи гирён
لبِ عطشان و دلِ سوخته و دیدهیِ گریان
То ба роҳи ту ҷудо мешудӣ аз ханҷари дигар
تا به راهِ تو جدا میشدی از خنجر دیگر
Кош аз баҳри сари найзаи вазири сами мураккаб
کاش از بهرِ سرِ نیزه و زیرِ سُمِ مَرکب
Буд аз баҳри ҳусайни сад сар ва сад пайкари дигар
بود از بهرِ حسین صد سر و صد پیکر دیگر
Баҳри қурбон шудани кӯии ту андари роҳи уммат
بهرِ قربان شدنِ کویِ تو اندر رهِ امّت
Доштами кош дар ин дашти балои Акбари дигар
داشتم کاش در این دشتِ بلا اکبر دیگر
То зи пайкони балои чоки намоянди гулӯяш
تا ز پیکانِ بلا چاک نمایند گلویش
эй дариғо ки маро нест алии Асғари дигар
ای دریغا که مرا نیست علی اصغرِ دیگر
То ҷудои бор дигар мешудӣ аз зарбати шамшер
تا جدا بارِ دیگر میشدی از ضربتِ شمشیر
Кош май буд дар ангушти ман ангуштари дигар
کاش میبود در انگشتِ من انگشتر دیگر
Сорибон то ки ҷудо аз тамаъ банд намӯдӣ
ساربان تا که جدا از طمعِ بند نمودی
Коши даст дигарам будӣу банди зари дигар
کاش دستِ دگرم بودی و بندِ زر دیگر
Снгборон бинмуданд серумро бсрнӣ
سنگباران بنمودند سرم را به سرِ نی
Кош чун Кӯфа ва чу нашом бадии кишвари дигар
کاش چون کوفه و چون شام بُدی کشور دیگر
То серумро биниҳодӣ сари хокистари матбах
تا سرم را بنهادی سرِ خاکسترِ مطبخ
Кош чун хўлии дигари бадӣу кофари дигар
کاش چون خولیِ دیگر بُدی و کافر دیگر
То зи Кӯфаи барра шом барандаш ба асирӣ
تا ز کوفه به ره شام برندش به اسیری
Ҳамчуи зайнаби бадӣ эй коши марои хоҳи дигар
همچو زینب بُدی ای کاش مرا خواهر دیگر
Шомён то бинмоӣанд тамаъи баҳри канизӣ
شامیان تا بنمایند طمع بهرِ کنیزی
Кош май буд яке Фотимаам духтари дигар
کاش میبود یکی فاطمهام دختر دیگر
Шарҳи созанди мари шама аз дафтар ( сомит )
شرح سازند مَر شمهای از دفترِ «صامت»
Ки ба ҳар гӯшаи з нав гашта бпои маҳшари дигар
که به هر گوشه ز نو گشته به پا محشر دیگر