эй сарварӣ ки мадҳи сарое барои ту
ای سَروَری که مدحسرایی برایِ تو
Карда ба ояи ояи қуръони худои ту
کرده به آیه آیهی قرآن، خدایِ تو
Бошад муайяни дафтари озодии сқр
باشد مُعیندفترِ آزادیِ سَقَر
Рӯзи ҳисоби дафтари мадҳу санои ту
روزِ حساب، دفترِ مدح و ثنایِ تو
Кори набии зи меҳр набувват гирифт сар
کارِ نبی ز مهرِ نبوت گرفت سر
Аз дасти қудрати ту ва аз нақши пои ту
از دستِ قدرتِ تو و از نقشِ پایِ تو
То рӯз растхез нахоҳад шудани тамом
تا روزِ رستخیز، نخواهد شدن تمام
Тавсифи зӯру панҷаи хайбари гушои ту
توصیفِ زور و پنجهی خیبرگشایِ تو
Аз Ямани муваллиди ту ҳарами гашти муҳтарам
از یُمنِ مولدِ تو، حرم گشت محترم
Шуд босафои замини сафо аз сафои ту
شد باصفا زمینِ صفا از صفایِ تو
Аз хавфи ҳавли рӯз ҷазо оварад паноҳ
از خوفِ هولِ روزِ جزا، آورَد پناه
Афроди мумкиноти бзли ливои ту
افرادِ ممکنات به ظلِّ لوایِ تو
Одами зи файзи қурби ҷўои ту ё алӣ
آدم ز فیضِ قربِ جوارِ تو یا علی
Шуд оқибати бихир чу Нӯҳ аз навой ту
شد عاقبتبهخیر، چو نوح از نوایِ تو
Дорад ҳануз замзамаи офарин бар лаб
دارد هنوز زمزمهی آفرین به لب
Мрҳби зи зӯру бозуии хайбари гушои ту
مرحب ز زور و بازویِ خیبرگشایِ تو
Ҳар касе меравад зи ҷаҳони вақти эҳтизор
هر کس که میرود ز جهان وقتِ احتضار
Ҷони азизи хеши намояди фазои ту
جانِ عزیزِ خویش نماید فدایِ تو
Аз чаҳ наомадӣ зи Наҷафи сӯии Карбало
از چه نیامدی ز نجف سویِ کربلا؟
Вақти шаҳодати шаҳ бе ақрабои ту
وقتِ شهادتِ شهِ بیاقربایِ تو
То бенгарӣ чигуна баради шимур аз қафо
تا بنگری چگونه بُرَد شمر از قفا
Сар аз тани ҳусайни шаҳи сари ҷудои ту
سر از تنِ حسین، شهِ سرجدایِ تو
То бенгарӣ чигуна баради шимур аз қафо
تا بنگری چگونه کند عجز و التماس
Сар аз тани ҳусайни шаҳи сари ҷудои ту
در پیشِ شمر، زینبِ بیآشنایِ تو
То бенгарӣ чигуна кунад аҷзу илтимос
چون شمر کرد جا به سرِ سینهی حسین
Дар пеши шимури зайнаб бе ошнои ту
خالی به دشتِ کربوبلا بود جایِ تو
Чун шимур кард ҷои басари синаи ҳусайн
خولی نهاد بر سرِ خاکسترِ تنور
Холӣ ба дашти крббло буд ҷои ту
رأسِ حسینِ تشنهلبِ باوفایِ تو
Хўлии ниҳод бар сари хокистари танур
آخِر ز بیوفاییِ کوفی به رویِ خاک
Раси ҳусайни ташнаи лаб бо вафои ту
خاکستری شد آینهی حقنمایِ تو
Оҳри занӣ , Фоӣӣ кӯфӣ биравӣ хок
گویم ز دستِ بستهی کلثوم در طناب؟
Хокистарӣ шуд оина ҳақ намой ту
یا طوقِ ظلم و گردنِ زینالعبایِ تو
Гӯям зи дасти бастаи кулсум дар таноб
شاها به وقتِ مرگ، دلِ «صامتِ» حَزین
ё тавқи зулму гардани зини алъбои ту
باشد در انتظارِ امیدِ لقایِ تو