Умр дар манқибати ҳайдар каррор гузошт

عمر در منقبت حیدر کرار گذاشت

Ҳбзои зиндагии ман ки дар ин кори гузашт

حبذا زندگی من که در این کار گذشت

Сайфи мслўли худованд ки дар мавқеи ҷанг

سیف مسلول خداوند که در موقع جنگ

Банки такбири вай аз гунбади даввори гузашт

بانک تکبیر وی از گنبد دوار گذشت

Шавҳари Фотимаи тоҳираи домоди расӯл

شوهر فاطمه‌ی طاهره، داماد رسول

Ки зи ҷон дар мадади Аҳмади мухтори гузашт

که ز جان در مدد احمد مختار گذشت

Даҳани хештани олӯда лаззот накард

دهن خویشتن آلوده‌ی لذّات نکرد

Хӯрд нони ҷӯ ва аз даҳри сбкбори гузашт

خورد نان جو و از دهر سبکبار گذشت

Баст дар тарбияти ҷони назар аз улфати тан

بست در تربیت جان نظر از الفت تن

Ба таманнои рухи ёр аз ағёри гузашт

به تمنای رخ یار، از اغیار گذشت

эй амӣрӣ ки шудаи барқи тани хирмани куфр

ای امیری که شده برق تن خرمن کفر

Ҳар куҷои шуълаи теғи ту ба пайкори гузашт

هر کجا شعله‌ی تیغ تو به پیکار گذشت

Мункиратро буд ин бас ки зи дунё ба ҳаҷем

منکرت را بود این بس که ز دنیا به جحیم

Гуфт алнори влои алъору сӯии нори гузашт

گفت «النارُ ولا العارُ» و سویِ نار گذشت

намекунад шукр ки рафтаи зи ҷаҳаннам ба биҳишт

می‌کند شکر که رفته ز جهنم به بهشت

Ҳар ки дар нози зи теғи ту ба ночори гузашт

هر که در غاز ز تیغ تو به ناچار گذشت

Амрро будгар инкори ядуллоҳии ту

عمرو را بود گر انکار یداللهی تو

Хӯрд чун чоштии теғи ту зонкори гузашт

خورد چون چاشنی تیغ تو زانکار گذشت

Хости мрҳб ки зи дасти ту гурезади сӯии нор

خواست مرحب که ز دست تو گریزد سوی نار

Чора дар додан ҷон дид ва ба як бори гузашт

چاره در دادن جان دید و به یک بار گذشت

ё алии сӯии сафи крб ва бало кун гузарӣ

یا علی سوی صف کرب‌و‌بلا کن گذری

То бибинӣ ба ҳусайнат чаҳ зи ашрори гузашт

تا ببینی به حسینت چه ز اشرار گذشت

Оҳ аз он лаҳза ки шоҳи шуҳадо дар майдон

آه از آن لحظه که شاه شهدا در میدان

Ба сари куштаи аббоси аламдори гузашт

به سر کُشته‌ی عباس علمدار گذشت

Гуфт эй пушту паноҳи сипаҳ бе сардор

گفت ای پشت و پناه سپه بی‌سردار

Хез ва бингар чаҳ ба ман бе ту зи куффори гузашт

خیز و بنگر چه به من بی تو ز کفار گذشت

Зиндагӣ бе ту на танҳо ба ҳусайни гашти ҳаром

زندگی بی تو نه تنها به حسین گشت حرام

Оби як ҷои зи сари итрати атҳори гузашт

آب یک جا ز سر عترت اطهار گذشت

Камарам хам шуд аз ин ғусса ва хӯн шуд ҷигарам

کمرم خم شد از این غصه و خون شد جگرم

То ки дасти ту дарин маърака аз кори гузашт

تا که دست تو درین معرکه از کار گذشت

Шуд сӯии шоми муҳайёии асирии зайнаб

شد سوی شام مهیای اسیری زینب

Рӯзи осӯдагии обиди бемори гузашт

روز آسودگی عابد بیمار گذشت

Хези хиҷлати макаш аз рӯй сакина ки дигар

خیز خجلت مکش از روی سکینه که دگر

Обро кард фаромӯшу зи исрори гузашт

آب را کرد فراموش و ز اصرار گذشت

Хуши бад-ӣни давлати ҷовид ки умр ( сомит )

خوش بدین دولت جاوید که عمر (صامت)

Ба азои дории шоҳаншаҳ бе ёри гузашт

به عزا داری شاهنشه بی‌یار گذشت