Бози оростаи байнами сафи мижгони ту ро

باز آراسته بینم صف مژگان تو را

Азми ғавғо буд он наргиси фаттони ту ро

عزم غوغا بود آن نرگس فتان تو را

Кош ояд маи канъон ва бибинад дар банд

کاش آید مه کنعان و ببیند در بند

Баси ҷӯи худ бесару потраҳи афшони ту ро

بس جو خود بی سر و پاطره افشان تو را

Даъвии ҳасан ба Юсуф нашудӣ рост ба Миср

دعوی حسن به یوسف نشدی راست به مصر

Гар накардӣ ватани он чоҳи зи нхдони ту ро

گر نکردی وطن آن چاه ز نخدان تو را

Ҳақ неъмат нашносад бар аҳли басар

حق نعمت نشناسد بر اهل بصر

Ҳар ки аз дидаи برارد бар пайкони ту ро

هر که از دیده برآرد بر پیکان تو را

Ошёнӣ нашудаш ёфт зи дил бар сари дил

آشیانی نشدش یافت ز دل بر سر دل

Мўбаҳ мӯаст чу дили зулфи парешони ту ро

موبه موست چو دل زلف پریشان تو را

Нарасонад ба лабаши ҷоми таҷаллӣ май ишқ

نرساند به لبش جام تجلی می عشق

Ҳар ки нозад ба назари гардиши чашмони ту ро

هر که نازد به نظر گردش چشمان تو را

Ба тааммул чаҳ кашии теғ ба қатл ( сомит )

به تامل چه کشی تیغ به قتل (صامت)

Хўнбҳо нест сафи ҳашари шаҳидони ту ро

خونبها نیست صف حشر شهیدان تو را