Чу шоҳи ташнаи ҷигари роҳ корзор гирифт
چو شاه تشنه جگر راه کارزار گرفت
Паии қаттол ба ба кафи теғ обдор гирифт
پی قتال به به کف تیغ آبدار گرفت
зи ваҳшати адаму инқилоби худ олам
ز وحشت عدم و انقلاب خود عالم
Хат амон задам теғи пар шарор гирифт
خط امان زدم تیغ پر شرار گرفت
Миён маърака омад ба як ҷаҳони ҳайбат
میان معرکه آمد به یک جهان هیبت
Сафи ҷидол ба сад фахр ва иқтидор гирифт
صف جدال به صد فخر و اقتدار گرفت
Хитоб кард ки эй қавм аз чаҳ рӯ бояд
خطاب کرد که ای قوم از چه رو باید
Ба итрати набӣ ингуна сахт кор гирифт
به عترت نبی اینگونه سخت کار گرفت
Ман он ҳусайн магар нестам ки рӯҳи аломин
من آن حسین مگر نیستم که روح الامین
Ба даҳри хизмати ман баҳр ифтихор гирифт
به دهر خدمت من بهر افتخار گرفت
Ман он ҳусайн магар нестам ки хатми русул
من آن حسین مگر نیستم که ختم رسل
Гуҳам ба дӯши гуҳи оғӯши гуҳ канор гирифт
گهم به دوش گه آغوش گه کنار گرفت
Чу аз ҳиҷоз ба сӯии Ироқами овардед
چو از حجاز به سوی عراقم آوردید
Нифоқро з чаҳ бояд ба худ шиор гирифт
نفاق را ز چه باید به خود شعار گرفت
Ҳар ончӣ мавъиза фармуд менакард асар
هر آنچه موعظه فرمود مینکرد اثر
Забони панд раҳо кард ва зулфиқор гирифт
زبان پند رها کرد و ذوالفقار گرفت
зи наърае ки кашид аз ҷигар ҷаҳон ларзид
ز نعرهای که کشید از جگر جهان لرزید
зи гови арзу зшири фалак қарор гирифт
ز گاو ارض و زشیر فلک قرار گرفت
Ишорае ки ба теғи ду сар намӯд басар
اشارهای که به تیغ دو سر نمود بسر
Тан аз ямин бияфканаду сар аз ясор гирифт
تن از یمین بیفکند و سر از یسار گرفت
Чу зарби даст худо дид хасм дар пайкор
چو ضرب دست خدا دید خصم در پیکار
Ду асбаи рӯ ба ҷаҳаннами раҳ фирор гирифт
دو اسبه رو به جهنم ره فرار گرفت
Вале чаҳ суд низ зад ба қатраи хӯнӣ
ولی چه سود نیز زد به قطره خونی
Ки тири ҳармалаи зи он Тифл ширхора гирифт
که تیر حرمله ز آن طفل شیرخواره گرفت
Суфӯф куфр дариду Музаффару Мансур
صفوف کفر درید و مظفر و منصور
Шати Фурот ба шамшери шуъла бор гирифт
شط فرات به شمشیر شعله بار گرفت
Миён шат шуд ва бар об ончунон нагирист
میان شط شد و بر آب آنچنان نگریست
Шатии миёни шат аз чашм ашкбор гирифт
شطی میان شط از چشم اشکبار گرفت
Ба ёди ташнаи лабони оҳ сўзнок кашид
به یاد تشنه لبان آه سوزناک کشید
Ки оҳаш аз дили оби равон шарор гирифт
که آهش از دل آب روان شرار گرفت
Чу буд дар назараши коми хушки атфолаш
چو بود در نظرش کام خشک اطفالش
Нахурд обу дил аз шат ба ихтиёр гирифт
نخورد آب و دل از شط به اختیار گرفت
Ба ӯҳдаи ваъдаи рӯзи аласти кари вафо
به عهده وعده روز الست کر وفا
з шавқ дод сарви васл кирдигор гирифт
ز شوق داد سرو وصل کردگار گرفت
Нахурд об агар сибти Мустафо ( ҷониб )
نخورد آب اگر سبط مصطفی (جانب)
Ҳазор ти зи ғамаши чашм рӯзгор гирифт
هزار ط ز غمش چشم روزگار گرفت