Дигар надидаи ситами каши ҷаҳони муқобили зайнаб
دگر ندیده ستم کش جهان مقابل زینب
Сиришта шуд ба ғаму дарди гӯиёи гули зайнаб
سرشته شد به غم و درد گوئیا گل زینب
Ба ҷузи асирӣу таъни синону таънаи душман
به جز اسیری و طعن سنان و طعنه دشمن
зи зиндагонӣ дунё нагашт ҳосили зайнаб
ز زندگانی دنیا نگشت حاصل زینب
зи баъди қтлбродри миёни кӯфӣу шомӣ
ز بعد قتلبرادر میان کوفی و شامی
Баҳри дам аз ғаму дардӣ шикаста шуд дили зайнаб
بهر دم از غم و دردی شکسته شد دل زینب
Кунам ҳикояти силии шимур ва рӯй сакина
کنم حکایت سیلی شمر و روی سکینه
Ва ё з бастани бозуӣ дар слосли зайнаб
و یا ز بستن بازوی در سلاسل زینب
Миёни лашгар аъдо надот чодару мъҷр
میان لشگر اعدا ندات چادر و معجر
Ба сӯии србмаҳи чеҳраи гашти ҳоили зайнаб
به سوی سربمه چهره گشت حایل زینب
Ба роҳ шом намуданд насби лашгари Кӯфа
به راه شام نمودند نصب لشگر کوفه
Сари бародар ӯро ба пеши маҳмили зайнаб
سر برادر او را به پیش محمل زینب
Дигар набӯд мақомӣ барои итрати тоҳо
دگر نبود مقامی برای عترت طه
Ки дар хароба бе сақфи гашти манзили зайнаб
که در خرابه بیسقف گشت منزل زینب
Фиғон ки зад зи ситами хайзарони язиди сияҳ рӯй
فغان که زد ز ستم خیزران یزید سیهروی
Ба раси ташнаи лаби Карбалои муқобили зайнаб
به راس تشنهلب کربلا مقابل زینب
Сазад ки фахр кунад ( сомит ) ҳазини бадви олам
سزد که فخر کند (صامت) حزین بدو عالم
Ки шуд ба айни гадои ғуломи мқбли зайнаб
که شد به عین گدایی غلام مقبل زینب