Расед номаи фатҳи убайди зишти бади ахтар
رسید نامه فتح عبید زشت بد اختر
зи шаҳри Кӯфаи вайрона ба Мадинаи атҳар
ز شهر کوفه ویرانه به مدینه اطهر
Барои хондани он номаи рӯсиёҳи хатибӣ
برای خواندن آن نامه روسیاه خطیبی
Басони сикка хориҷ намӯд ҷой ба минбар
بسان سکه خارج نمود جای به منبر
Навишта буд ки алиўми даври давр язид аст
نوشته بود که الیوم دور دور یزید است
Ки рӯ ба кӯтаҳӣ оварад рӯзи оли паямбар
که رو به کوتهی آورد روز آل پیمبر
Навишта буд ки бо халқи ташна бар лаби дарё
نوشته بود که با خلق تشنه بر لب دریا
Бурӣда шуд зи тани шаҳриёри ташнаи лабони сар
بریده شد ز تن شهریار تشنه لبان سر
Навишта буд ки аз манбаи об то ба қиёмат
نوشته بود که از منبع آب تا به قیامت
Ба ҷони итрат ҳайдар фикандам аз аташи озар
به جان عترت حیدر فکندم از عطش آذر
Навишта буд ки андари шаби арӯсии қосим
نوشته بود که اندر شب عروسی قاسم
Ҳинои айши зи хӯни басти наварӯси мукаддар
حنای عیش ز خون بست نوعروس مکدر
Навишта буд ки Лайлии з бе касе шудаи маҷнӯн
نوشته بود که لیلی ز بیکسی شده مجنون
Ба хӯни тпидаҳи зи шамшери кин чу қомати Акбар
به خون طپیده ز شمشیر کین چو قامت اکبر
Навишта буд ки аббоси баҳри қатраи обӣ
نوشته بود که عباس بهر قطره آبی
зи даст хасм шуд ӯро ҷудои ду дасти зи пайкар
ز دست خصم شد او را جدا دو دست ز پیکر
Навишта буд ба Асғар касе накард тараҳҳум
نوشته بود به اصغر کسی نکرد ترحم
Нишони тири ситами бигноаҳи сохт чу Асғар
نشان تیر ستم بیگناه ساخت چو اصغر
Навишта буд ки чу нашуд ҳусайни савор ба мураккаб
نوشته بود که چو نشد حسین سوار به مرکب
Ркобдорӣ ӯро намӯд зайнаби музтар
رکابداری او را نمود زینب مضطر
Навишта буд ки карданд манъи оби равон ро
نوشته بود که کردند منع آب روان را
зи аҳли байти расӯлу ҳарими соқии кавсар
ز اهل بیت رسول و حریم ساقی کوثر
Навишта буд таниро ки буд дӯши набии ҷо
نوشته بود تنی را که بود دوش نبی جا
Ба хок роҳ фиканданд ҳамчуи меҳри мунаввар
به خاک راه فکندند همچو مهر منور
Навишта буд ки парвардаи расӯли худо ро
نوشته بود که پرورده رسول خدا را
Шикасти синааш аз зарби чикмаи шимури ситамгар
شکست سینهاش از ضرب چکمه شمر ستمگر
Навишта буд ки марҳам ба зх ӯ биниҳодем
نوشته بود که مرهم به زخ او بنهادیم
зи баъди қатли зи сами стўрчобку рҳўр
ز بعد قتل ز سم ستورچابک و رهور
Навишта буд ки кардем ғорат аз ҳарам ӯ
نوشته بود که کردیم غارت از حرم او
зи гӯшҳои занони гӯшвор бо зару зевар
ز گوشهای زنان گوشوار با زر و زیور
Навишта буд ки дар пеши чашми кӯфӣу шомӣ
نوشته بود که در پیش چشم کوفی و شامی
Ба фарқи итрат тоҳо намонад чодару мъҷр
به فرق عترت طه نماند چادر و معجر
Навишта буд ки гардид мизбони шаҳи дайн
نوشته بود که گردید میزبان شه دین
Ба шаҳри Кӯфаи миёни танури хўлии абтар
به شهر کوفه میان تنور خولی ابتر
Навишта буд ки доданд нон барисам тсдқ
نوشته بود که دادند نان برسم تصدق
Ба кӯдакони ғариби ҳусайн бекасу ёвар
به کودکان غریب حسین بیکس و یاور
Навишта буд ки бастанд аз барои асирӣ
نوشته بود که بستند از برای اسیری
Ҳарими хатми русулро ба як таноби саросар
حریم ختم رسل را به یک طناب سراسر
Навишта буд сари сурони Ясрибу бтҳо
نوشته بود سر سوران یثرب و بطحا
Ба нӯки найзаи сӯй шом рафт бо рухи анвар
به نوک نیزه سوی شام رفت با رخ انور
Навишта буд ки лаъиби лаби ҳусайни алӣ ро
نوشته بود که لعب لب حسین علی را
Кабӯд кард язиди лъини зи зарбати хизр
کبود کرد یزید لعین ز ضربت خیزر
Кунун ки лол нагардӣ зи шарҳи ин ғами азмӣ
کنون که لال نگردی ز شرح این غم عظمی
Бисӯз ( сомит ) маҳзун бисоз то сафи маҳшар
بسوز (صامت) محزون بساز تا صف محشر