эй рӯй ту шамъи маҳфили мо

ای روی تو شمع محفل ما

Зад доғи ту шуъла бар дили мо

زد داغ تو شعله بر دل ما

Рафтӣ ваз рафтан ту гардид

رفتی وز رفتن تو گردید

Дарду ғаму ғуссаи моили мо

درد و غم و غصه مایل ما

эй силсилаи Қурайшро сар

ای سلسله قریش را سر

Байни гардан дар слосли мо

بین گردن در سلاسل ما

эй малики имомат аз ту обод

ای ملک امامت از تو آباد

Шуд кунҷи харобаи манзили мо

شد کنج خرابه منزل ما

эй нури ду дидаи ашки дида

ای نور دو دیده اشک دیده

Гардӣда пас аз ту ҳосили мо

گردیده پس از تو حاصل ما

Маро чаҳ кунам кунун ки бар не

مه را چه کنم کنون که بر نی

Шуд меҳри рахти муқобили мо

شد مهر رخت مقابل ما

Ин раси мунири тўост бар не

این راس منیر تواست بر نی

ё моҳ ба пеши маҳфили мо

یا ماه به پیش محفل ما

Шуд заврақи дили ғариқ дар гул

شد زورق دل غریق در گل

Гум гашта тариқи соҳили мо

گم گشته طریق ساحل ما

Ин ним нафас ки монда дар тан

این نیم نفس که مانده در تن

Гардӣда зи марги ҳоили мо

گردیده ز مرگ حایل ما

Зад шуъла ба ҷони душману дӯст

زد شعله به جان دشمن و دوست

Фарёду фиғон ба смли мо

فریاد و فغان به سمل ما

( сомит ) ба фалак наёвард

(صامت) به فلک نیاورد

То гашта ғуломи мқбли мо

تا گشته غلام مقبل ما