Чун ба сафи крбу балои бахту ҳб ёр шуд

چون به صفِ کرب‌وبلا، بختِ وهب یار شد

Омаду ёри писари Аҳмад мухтор шуд

آمد و یارِ پسرِ احمدِ مختار شد

Охири кори писари духтари хиролоном

آخرِ کارِ پسرِ دخترِ خیرُالانام

Бо писари саъди лъини баста ба пайкор шуд

با پسرِ سعدِ لعین، بسته به پیکار شد

Чархи паии ибтилои кӯфт ба кӯси бало

(چرخ پیِ ابتلا، کوفت به کوسِ بلا)

Абри бало хайма зад бар сари крбу бало

(ابرِ بلا خیمه زد، بر سرِ کرب‌وبلا)

Гиряи кунони модари зори вҳби шери дил

گریه‌کنان مادرِ زارِ وهبِ شیردل

Рӯ ба вҳб кард ки эй ғайрати сарви чгл

رو به وهب کرد که: ای غیرتِ سروِ چِگِل!

Ҳастӣ агар толиб бар ҳам задани обу гул

هستی اگر طالبِ برهم‌زدنِ آب و گِل

Хез ки ҳангоми таҷаллои рух ёр шуд

خیز که هنگامِ تجلایِ رخِ یار شد

Чархи паии ибтилои кӯфт ба кӯси бало

(چرخ پیِ ابتلا، کوفت به کوسِ بلا)

Абри бало хайма зад бар сари крбу бало

(ابرِ بلا خیمه زد، بر سرِ کرب‌وبلا)

Шамъи рухи дӯст ба парвона шарар ме занад

شمعِ رخِ دوست به پروانه شرر می‌زند

Бар ҷигари перу ҷавони тир назар ме занад

بر جگرِ پیر و جوان، تیرِ نظر می‌زند

Хез ки маъшӯқи азали ҳалқа ба дар ме занад

خیز که معشوقِ ازل، حلقه به در می‌زند

Мавсим афрӯхтани талъат дилдор шуд

موسمِ افروختنِ طلعتِ دلدار شد

Чархи паии ибтилои кӯфт ба кӯси бало

(چرخ پیِ ابتلا، کوفت به کوسِ بلا)

Абри бало хайма зад бар сари крбу бало

(ابرِ بلا خیمه زد، بر سرِ کرب‌وبلا)

Гар ба таманнои ҳаёти абадии моилӣ

گر به تمنایِ حیاتِ ابدی مایلی

Дар ҳамаи ҳолеи надиҳади дасти чунин маҳфилӣ

در همه حالی ندهد دست، چنین محفلی

Қофилаи афтода ба раҳи хуфтаи ту дар манзилӣ

قافله افتاده به ره، خفته تو در منزلی؟

Сибти расӯли арабии қофила солор шуд

سبطِ رسولِ عربی، قافله‌سالار شد

Чархи паии ибтилои кӯфт ба кӯси бало

(چرخ پیِ ابتلا، کوفت به کوسِ بلا)

Абри бало хайма зад бар сари крбу бало

(ابرِ بلا خیمه زد، بر سرِ کرب‌وبلا)

Хезу раҳи ишқ ба арбоби ҳавас танг кун

خیز و ره عشق به اربابِ هوس تنگ کن

Панҷаи зи хӯн дар назари хӯни худо ранг кун

پنجه ز خون، در نظرِ خونِ خدا رنگ کن

Рӯ ба рикоби писари шери худо ҷанг кун

رو به رکابِ پسرِ شیرِ خدا جنگ کن

Чун ки ҳусайни бен алӣ бекас ва беёр шуд

چون‌که حسین‌ بن‌ علی، بی‌کس و بی‌یار شد

Чархи паии ибтилои кӯфт ба кӯси бало

(چرخ پیِ ابتلا، کوفت به کوسِ بلا)

Абри бало хайма зад бар сари крбу бало

(ابرِ بلا خیمه زد، بر سرِ کرب‌وبلا)

Рӯ бификан бар зибри қасри саодати каманд

رو بفکن بر زِبَرِ قصرِ سعادت کمند

Модари худро бабр Фотима кун сари баланд

مادرِ خود را به برِ فاطمه کن سربلند

Бар фарси ҳиммати худ зин саодат бабанд

بر فُرُسِ همتِ خود، زینِ سعادت ببند

Вақти ҷудои сохтани ёри з ағёр шуд

وقتِ جدا ساختنِ یار ز اغیار شد

Чархи паии ибтилои кӯфт ба кӯси бало

(چرخ پیِ ابتلا، کوفت به کوسِ بلا)

Абри бало хайма зад бар сари крбу бало

(ابرِ بلا خیمه زد، بر سرِ کرب‌وبلا)

Ҷавҳари мардонагии имрӯзи намояди зуҳӯр

جوهرِ مردانگی امروز نماید ظهور

Зани сарпое ба арӯс ва ба нишоту сарвар

زن سرپایی به عروس و به نشاط و سرور

Гар ба ҷинони толибӣу роғиби ҳуру қусӯр

گر به جَنان طالبی و راغبِ حور و قصور

Ҷинати ту крбу балои таҳтҳо алонҳор шуд

جنتِ تو کرب‌وبلا، «تحتِها الانهار» شد

Чархи паии ибтилои кӯфт ба кӯси бало

(چرخ پیِ ابتلا، کوفت به کوسِ بلا)

Абри бало хайма зад бар сари крбу бало

(ابرِ بلا خیمه زد، بر سرِ کرب‌وبلا)

Кард вҳб назд шаҳи ташнаи лабони сари қадам

کرد وهب نزدِ شهِ تشنه‌لبان سر قدم

Сохт талаби рухсати майдон аз эмом амам

ساخت طلب رخصتِ میدان ز امامِ امم

Зад ба яке ҳамлаи сафи лашгари адуон ба ҳам

زد به یکی حمله، صفِ لشکرِ عدوان به هم

Теғи кафши барқи тани лашгар куффор шуд

تیغِ کَفَش، برقِ تَنِ لشکرِ کفار شد

Чархи паии ибтилои кӯфт ба кӯси бало

(چرخ پیِ ابتلا، کوفت به کوسِ بلا)

Абри бало хайма зад бар сари крбу бало

(ابرِ بلا خیمه زد، بر سرِ کرب‌وبلا)

Мӯри сифати лашгари куффор ба ҷӯш омаданд

مورصفت لشکرِ کفار به جوش آمدند

Пели дмонро паии куштан ба хурӯш омаданд

پیل‌دمان را پیِ کشتن به خروش آمدند

Ҷумлаи паии қатли сулаймон чу вуҳуш омаданд

جمله پیِ قتلِ سلیمان چو وحوش آمدند

Рӯз ба чашми вҳби охир чаҳ шаб тор шуд

روز به چشمِ وهب آخر چو شبِ تار شد

Чархи паии ибтилои кӯфт ба кӯси бало

(چرخ پیِ ابتلا، کوفت به کوسِ بلا)

Абри бало хайма зад бар сари крбу бало

(ابرِ بلا خیمه زد، بر سرِ کرب‌وبلا)

Оқибат аз авҷи шаҳодат чу ҳумои пари ниҳод

عاقبت از اوجِ شهادت چو هما پَر نهاد

Ҳнҷри худро зўФои барадами ханҷари ниҳод

حنجرِ خود را ز وفا، بر دَمِ خنجر نهاد

Дар раҳи савдои ҳусайни бен алии сари ниҳод

در ره سودایِ حسین‌ بن‌ علی، سر نهاد

Бар сари ваии хусрав бебор ва мададкор шуд

بر سرِ وی خسروِ بی‌يار و مددکار شد

Чархи паии ибтилои кӯфт ба кӯси бало

(چرخ پیِ ابتلا، کوفت به کوسِ بلا)

Абри бало хайма зад бар сари крбу бало

(ابرِ بلا خیمه زد، بر سرِ کرب‌وبلا)

Аз мадади бахти баланди вҳби навҷавон

از مددِ بختِ بلندِ وهبِ نوجوان

Кард назар бар рухи зебои ҳусайни додҷон

کرد نظر بر رخِ زیبایِ حسین، داد جان

Гашти шаҳи ташнаи лабонро ба замин чун макон

گشت شهِ تشنه‌لبان را به زمین چون مکان

Шимури равон бар сари он сарвар Аброр шуд

شمر روان بر سرِ آن سَروَرِ ابرار شد

Чархи паии ибтилои кӯфт ба кӯси бало

(چرخ پیِ ابتلا، کوفت به کوسِ بلا)

Абри бало хайма зад бар сари крбу бало

(ابرِ بلا خیمه زد، بر سرِ کرب‌وبلا)

То кунад аз тани сари меҳри афсар ӯро ҷудо

تا کُنَد از تن، سرِ مِهر‌افسرِ او را جدا

Ҷо ба сари сина вай кард санг бе ҳаё

جا به سرِ سینهٔ وی کرد سگِ بی‌حیا

Ташна ҷудо кард сари сибти набӣ аз қафо

تشنه جدا کرد سرِ سبطِ نبی از قفا

( сомит ) аз ин марҳала аз чашм гуҳарбор шуд

«صامت» از این مرحله، از چشم گهربار شد

Чархи паии ибтилои кӯфт ба кӯси бало

(چرخ پیِ ابتلا، کوفت به کوسِ بلا)

Абри бало хайма зад бар сари крбу бало

(ابرِ بلا خیمه زد، بر سرِ کرب‌وبلا)