Ҷон ба қурбони вафоят ё ҳабиби бен мазоҳир
جان به قربانِ وفایت، یا حبیبِ بِن مظاهر!
Бо сар аз тани ҷудоят ё ҳабиби бен мазоҳир
با سَرِ از تن جدایت، یا حبیب بن مظاهر!
Аз саодати сар ба пои сибт пайғамбар наҳодӣ
از سعادت، سر به پایِ سبطِ پیغمبر نهادی
Сари фидои хоки поят ё ҳабиби бен мазоҳир
سر فدایِ خاکِ پایت، یا حبیب بن مظاهر!
Тинати хоки туро ҳақ чун з алӣин сиришта
طینتِ خاکِ تو را حق، چون ز علّیین سرشته
Лолаи тавҳидро дар гулшани қалби ту кушта
لالهٔ توحید را در گلشنِ قلبِ تو کِشته
Номи некӯии туро дар дафтари имони навишта
نامِ نیکویِ تو را در دفترِ ایمان نوشته
Сохт аз аҳли вилоят бо ҳабиби бен мазоҳир
ساخت از اهلِ ولایت، یا حبیب بن مظاهر!
Чун сарати аҳди аласти кибриёро дар гарав шуд
چون سرت عهدِ الستِ کبریا را در گرو شد
Дар мақоми имтиҳон чун ихтилофи нав ба нав шуд
در مقامِ امتحان، چون اختلافِ نوبهنو شد
Трқўогўёни зи Кӯфаи пайк ҳар дил пешрав шуд
«طُرُقوا»گویان ز کوفه، پیکِ هر دل پیشرو شد
Баради сӯии Карбалоят ё ҳабиби бен мазоҳир
بُرد سویِ کربلایت، یا حبیب بن مظاهر!
Хостии андари ватансозӣ маҳосинро хизобӣ
خواستی اندر وطن سازی محاسن را خضابی
Дар дилат пайдо шуд аз шӯри ҳусайнии инқилобӣ
در دلت پیدا شد از شورِ حسینی انقلابی
Дар замин Карбало кардӣ зи икрнгии шитобӣ
در زمینِ کربلا کردی ز یکرنگی شتابی
То з хӯн гардад ҳиноят ё ҳабиби бен мазоҳир
تا ز خون گردد حنایت، یا حبیب بن مظاهر!
Дар ҳавоӣ нафас гардад шавқи ҷонбозии фузӯнӣ
بر هوایِ نفس، کردی شوقِ جانبازی فزونی
Хешро ворастаа бинмудӣ зи дунӣу забунӣ
خویش را وارسته بنمودی ز دونی و زبونی
Кард охири тири маъшӯқи камоли абрӯии хӯнӣ
کرد آخر، تیرِ معشوق کمال، ابروی خونی
Кушта бо хӯни худоят ё ҳабиби бен мазоҳир
کُشته با خونِ خدایت، یا حبیب بن مظاهر!
Борвари гаштӣ ба зилли рأФти нахли имомат
باروَر گشتی به ظلِ رأفتِ نخلِ امامت
Гашти хоки турбатати мисдоқи эъҷози каромат
گشت خاکِ تربتت مصداقِ اعجازِ کرامت
Бобии антми заволи рӯзу шабу бас то қиёмат
بأبی أنتم؛ سؤالِ روز و شب، پس تا قیامت
Аз гадоу подшоҳат ё ҳабиби бен мазоҳир
از گدا و پادشاهت، یا حبیب بن مظاهر!
Шавқи дарёӣ ба даргоҳи ҳусайнат буд бар сар
شوقِ دربانی به درگاهِ حسینت بود بر سر
Ллаҳи алҳмди ин саодат шуд барои ту муяссар
لِلَّهُالحمد این سعادت شد برایِ تو مُیَسر
Комрон гар дидӣ андари базли ҷон то рӯзи маҳшар
کامران گردیدی اندر بذلِ جان، تا روزِ محشر
Гашти дарди ту давоят ё ҳабиби бен мазоҳир
گشت دردِ تو دوایت، یا حبیب بن مظاهر!
Чун ту будӣ ҳофизи қуръон аз он рӯ шуд ба даврон
چون تو بودی حافظِ قرآن، از آن رو شد به دوران
Чун сари ту бо ҳусайн бар нӯки не чун меҳри рахшон
چون سَرِ تو با حسین، بر نوکِ نی چون مِهرِ رخشان
Раъси шоҳи Карбало бар не чу ( сомит ) чашми гирён
رأسِ شاهِ کربلا بر نی چو «صامت» چشمگریان
Хонд қуръон аз бароят ё ҳабиби бен мазоҳир
خواند قرآن از برایت، یا حبیب بن مظاهر!