эй аҳли ҳарами алии Асғар
ای اهلِ حرم! علیِاصغر
Сайри об шудаи з об омад
سیراب شده ز آب، آمد
Шшмоҳаҳи нозпрўри ман
ششماههٔ نازپرورِ من
Осӯдаи з изтироб омад
آسوده ز اضطراب آمد
ӯро зи ҳарам ба оҳу афғон
او را ز حرم به آه و افغان
Барадами лаби ташнаи сӯии майдон
بردم لبِ تشنه سویِ میدان
Афсӯс ки аз ҷафои адуон
افسوس که از جفایِ عدوان
Лаби ташнау дил кабоб омад
لبتشنه و دلکباب آمد
Чун об равон нашуд насибаш
چون آبِ روان نشد نصیبش
Бигирифт аташи зи дили шикебаш
بگرفت عطش ز دل شکیبش
Дар хизмати модари ғарибаш
در خدمتِ مادرِ غریبش
Бесабр ва тавон ва тоб омад
بیصبر و توان و تاب آمد
Аз кӯфӣ шавам бе ҳимоят
از کوفیِ شومِ بیحمایت
Ранҷидаи зи бас ки бе ниҳоят
رنجیده ز بس که بینهایت
Аз ҳармала то кунад шикоят
از حرمله تا کُند شکایت
Гирён ба бар рубоб омад
گریان به بَرِ رباب آمد
Аз чанд ки тншгӣ кашида
از چند که تشنگی کشیده
Умеди зи зиндагии бурӣда
امید ز زندگی بریده
Ҷон додау ҳнҷри дарида
جان داده و حنجرِ دریده
Дар хайма ба сад шитоб омад
در خیمه به صد شتاب آمد
Аз чанд ки ба афғону зорӣ
از چند که به افغان و زاری
Кард аз паии об бе қарорӣ
کرد از پیِ آب بیقراری
Охир ба гулӯии ваии баборӣ
آخر به گلویِ وی به باری
Пайкони зи пай ҷавоб омад
پیکان ز پیِ جواب آمد
Бигирифт хаданг аз сари ҳуш
بگرفت خدنگ از سرش هوش
ӯро ғам об шуд фаромӯш
او را غمِ آب شد فراموش
Бо ҳалқи даридаи масти мадҳуш
با حلقِ دریده، مست و مدهوش
Андари сари даст боб омад
اندر سرِ دستِ باب آمد
Асғар ба гулӯии пораи пора
اصغر به گلویِ پارهپاره
Афтод ба фикри гоҳўораҳ
افتاد به فکرِ گاهواره
Шшмоҳаҳи шаҳиди ширхора
ششماهه شهیدِ شیرخواره
Баргашта барои хоб омад
برگشته برایِ خواب آمد
Дардо ки сипеҳри сифла парвар
دردا که سپهرِ سفلهپرور
Шуд ёр язид шавам абтар
شد یارِ یزیدِ شومِ ابتر
То дар ғами итрати паямбар
تا در غمِ عترتِ پیمبر
( сомит ) ки ҷаҳон хароб омад
«صامت»! که جهان خراب آمد