эй хусрав бесар эй боби громм

ای خسروِ بی‌سر، ای بابِ گرامم!

Бурданди зи Кувайти охири сӯии шомам

بردند ز کویت، آخر سویِ شامم

Дар шом ғарибон доданд мақомам

در شامِ غریبان، دادند مقامم

Талхаст аз ин ҷавр аз баҳри ту комам

تلخ است از این جور، از بهرِ تو کامم

Сайёди қазо буд умрӣ ба камӣнам

صیادِ قضا بود، عمری به کمینم

То худ ба кадомин даргоҳ нишинам

تا خود به کدامین، درگاه نشینم

Акнӯн ба ятемии афканди асирам

اکنون به یتیمی، افکند اسیرم

Кас нест расонади пеши ту паёмам

کس نیست رساند، پیشِ تو پیامم

Бурдор сари хеш аз баҳри назора

بردار سرِ خویش، از بهرِ نظاره

Даврон ба сакинаи бастаи раҳи чора

دوران به سکینه، بسته رهِ چاره

Резади зи ду чашмами ашк чу ситора

ریزد ز دو چشمم، اشکِ چو ستاره

Карданд сафарро аз ҷаври ҳаромам

کردند سفر را، از جور حرامم

Даврони зи ғамати хоки охир ба серум кард

دوران ز غمت خاک، آخر به سرم کرد

Аз санги адолат бебол ва пурм кард

از سنگِ عداوت، بی‌بال و پرم کرد

Дар вои ғурбати хуши дарба дирам кард

در وادیِ غربت، خوش دربه‌درم کرد

Дар гӯшаи меҳнат ҷо дод мудомам

در گوشهٔ محنت، جا داد مدامم

Бастии з чаҳ рӯи чашм аз духтари зорат

بستی ز چه رو چشم، از دخترِ زارت؟

эй ҷону тани ман бодо ба нисорат

ای جان و تنِ من، بادا به نثارت!

Карданд марои давр аз қурби ҷаворат

کردند مرا دور، از قربِ جوارت

Дар кунҷ хароба доданд мақомам

در کُنجِ خرابه، دادند مقامم

Бигрифта зи баси шимур бар ман зи ситами танг

بگرفته ز بس شمر، بر من ز ستم تنگ

Шеван шудаи корам чун мурғи шбоҳнг

شیون شده کارم، چون مرغِ شباهنگ

Ларзад дили душмани сӯзади ҷигари санг

لرزد دلِ دشمن، سوزد جگرِ سنگ

Аз нолаи субҳам аз гиряи шомам

از نالهٔ صبحم، از گریهٔ شامم

Бар оҳу фиғонами як тани надиҳади гӯш

بر آه و فغانم، یک تن ندهد گوش

Аз ҷаври синони дил дар сина занад ҷӯш

از جورِ سنان دل، در سینه زند جوش

Силӣ занадам шимур бинмуда фаромӯш

سیلی زندم شمر، بنموده فراموش

Каз оли расӯлами вази насли эмомам

کز آلِ رسولم، وز نسلِ امامم

Дар қайди ятемӣ ҳар кас ки асир аст

در قیدِ یتیمی، هر کس که اسیر است

Андари назари халқи пайваста ҳақир аст

اندر نظرِ خلق، پیوسته حقیر است

Бо пайки аҷали гӯи зуди ой ки дайр аст

با پیکِ اجل گو: زود آی که دیر است!

Шуд зиндагии даҳр эй боби ҳаромам

شد زندگیِ دهر، ای باب! حرامم

Акнӯн ки намуданд ин қавми зи кӣна

اکنون که نمودند، این قوم ز کینه

Раъсат ба сари не эй меҳри Мадина

رأست به سرِ نی، ای مِهرِ مدینه!

Кун гӯшаи чашмӣ гоҳе ба сакина

کن گوشهٔ چشمی، گاهی به سکینه

эй бадари мунирам эй моҳи тамомам

ای بدرِ منیرم، ای ماهِ تمامم!

эй гавҳари якто аз дарҷи каромат

ای گوهرِ یکتا، از دُرجِ کرامت!

эй ахтари тобон дар бурҷи имомат

ای اخترِ تابان، در برجِ امامت!

эй додраси халқ дар рӯзи қиёмат

ای دادرسِ خلق، در روزِ قیامت!

Шӯи ёвар ( сомит ) аз ҳавли қиёмам

شو یاورِ «صامت»، از هولِ قیامت