Чунин зи буғз кутуб шуд ривоятии таҳқиқ

چنین ز بغض کتب شد روایتی تحقیق

Ки кард оризаи рӯ ба Юсуфи садиқ

که کرد عارضه رو به یوسف صدیق

Заъифи гашту наҳиф аз қазои раббонӣ

ضعیف گشت و نحیف از قضای ربانی

Ҳилоли сони рух чун ба дар моҳи канъонӣ

هلال سان رخ چون به در ماه کنعانی

Басар расед зи девони умр ӯ муддат

بسر رسید ز دیوان عمر او مدت

Намӯд рӯз ба рӯзи он марази буии шиддат

نمود روز به روز آن مرض بوی شدت

зи Мисри баҳри тафарруҷ буи шуданд далел

ز مصر بهر تفرج بوی شدند دلیل

Ки то макон кунад андари миёни лаҷаи нил

که تا مکان کند اندر میان لجه نیل

зи гардану баданаши банди дард пора нашуд

ز گردن و بدنش بند درد پاره نشد

Ба ҳеҷ раҳи марази он ҷаноб чора нашуд

به هیچ ره مرض آن جناب چاره نشد

Фузуд сайру тамошо бар кун тани халалаш

فزود سیر و تماشا بر کن تن خللش

Фаро расед дар охир ба ҳукми ҳақи аҷалаш

فرا رسید در آخر به حکم حق اجلش

зи тунди бод фано шуд бисоти умраши тай

ز تند باد فنا شد بساط عمرش طی

Аҷал намӯд ба номаши пиёларо пар май

اجل نمود به نامش پیاله را پر می

Хабар барои Зулайхо расед бо суръат

خبر برای زلیخا رسید با سرعت

Ки эй бузурги хўотини ҳиҷлаи исмат

که ای بزرگ خواتین حجله عصمت

Мараз ба Юсуфи гули перҳани шадид шуда

مرض به یوسف گل پیرهن شدید شده

Дигар зи зиндагии даҳри нои умед шуда

دگر ز زندگی دهر نا امید شده

Биёу суҳбати дерина роръоит кун

بیا و صحبت دیرینه رارعایت کن

Марӣзи бистарии маргро иёдат кун

مریض بستری مرگ را عیادت کن

Ҷаҳон ба чашми Зулайхои сияҳ чу нил омад

جهان به چشم زلیخا سیه چو نیل آمد

Ба назд Юсуфи худ чун баравад нил омад

به نزد یوسف خود چون برود نیل آمد

Бихоб дид аниси дили мукаддари хеш

بخواب دید انیس دل مکدر خویش

Ба зер ҷома наҳуфтаст рӯй анвари хеш

به زیر جامه نهفتست روی انور خویش

Ниқоби Юсуф аз он рӯзи ҳамчу моҳ кашид

نقاب یوسف از آن روز همچو ماه کشید

Назар ба сӯрат моҳаш намӯд ва оҳ кашид

نظر به صورت ماهش نمود و آه کشید

зи ғуссаи тоири рӯҳаши зи малики тан пар зад

ز غصه طایر روحش ز ملک تن پر زد

з по фитад ва ба мотами ду даст бар сар зад

ز پا فتد و به ماتم دو دست بر سر زد

зи дӯди оҳи сияҳи чеҳраи ма ва хур кард

ز دود آه سیه چهره مه و خور کرد

зи хӯни дили садафи дидаро пар аз дар кард

ز خون دل صدف دیده را پر از در کرد

зи сари ду чашми Зулайхои раҳ фирор гирифт

ز سر دو چشم زلیخا ره فرار گرفت

Ба чашми Юсуфи Мисри вафо қарор гирифт

به چشم یوسف مصر وفا قرار گرفت

Дар ин муқаддамаи сиррӣ буд машав ғамнок

در این مقدمه سری بود مشو غمناک

Наҳуфтаастгар аз ҷоҳилон кам идрок

نهفته است گر از جاهلان کم ادراک

зи ишқи бохабарии гӯш гар диҳад сӯем

ز عشق باخبری گوش گر دهد سویم

Ба гуфта ёбад ва донад ки ман чаҳ ме гӯям

به گفته یابد و داند که من چه می‌گویم

Фиғони зи Юсуфи гулгуни қабои оли ъабо

فغان ز یوسف گلگون قبای آل عبا

Шаҳиди крбблои нури дидаи Заҳро

شهید کرببلا نور دیده زهرا

Ба дашти Марӣаи зайнаби ҳамидаи хоҳар ӯ

به دشت ماریه زینب حمیده خواهر او

Расед чун ки дар он қатлгоҳ бар сар ӯ

رسید چون که در آن قتلگاه بر سر او

Ба хоки дашт мулло дид сохтаи маскан

به خاک دشت مُلا دید ساخته مسکن

Ба рӯй синаи он шоҳи шимури зии алҷўшн

به روی سینه آن شاه شمر ذی‌الجوشن

Барои куштани он бе муайяни ташнаи ҷигар

برای کشتن آن بی‌معین تشنه جگر

Гирифтаи он саг беобрӯ ба кафи ханҷар

گرفته آن سگ بی‌آبرو به کف خنجر

Ба гиря гуфт ки эй рӯсиёҳ кам фурсат

به گریه گفت که ای روسیاه کم فرصت

Макаши ҳусайни марои лаҳза Эй бидиҳ муҳлат

مکش حسین مرا لحظه‌ای بده مهلت

Ки то ба хоҳиши дил сайр бингарам рӯйиш

که تا به خواهش دل سیر بنگرم رویش

Гул видоъ бичинам з рӯй некӯяш

گل وداع بچینم ز روی نیکویش

Ҷудо чаҳ мекунӣ эй шмир аз бадани сар ӯ

جدا چه می‌کنی ای شمیر از بدن سر او

Гузор то ки бабандам ду дидатар ӯ

گذار تا که ببندم دو دیده تر او

Гузор то ки занами бӯса бар лабу даҳанаш

گذار تا که زنم بوسه بر لب و دهنش

зи ашки чашми нуҳуми марҳамӣ ба захми таниш

ز اشک چشم نهم مرهمی به زخم تنش

Гузор каз тан ӯ рафъ офтоб кунам

گذار کز تن او رفع آفتاب کنم

Алоҷи тишнагӣ аз коми он ҷаноб кунам

علاج تشنگی از کام آن جناب کنم

Гузори бор дигар то ба хаймаи гуҳи брмш

گذار بار دگر تا به خیمه گه برمش

Ки ҷумлаи чашми броҳнду музтариби ҳарамаш

که جمله چشم براهند و مضطرب حرمش

Бидиҳ ба ваии ту дамии муҳлат эй ситами бунёд

بده به وی تو دمی مهلت ای ستم بنیاد

Ки монда дар раҳ ӯ чашми Сайиди саҷҷод

که مانده در ره او چشم سید سجاد

Бибин чаҳ бо лаб ӯ сӯзиш аташ карда

ببین چه با لب او سوزش عطش کرده

зи сӯзи ташнаи лабии зери теғ ғаш карда

ز سوز تشنه‌لبی زیر تیغ غش کرده

Гузор то дигар аз заъф дар хурӯш ояд

گذار تا دگر از ضعف در خروش آید

зи ҳуши рафтаи ҳусайнами дамӣ ба ҳуш ояд

ز هوش رفته حسینم دمی به هوش آید

Накард раҳм ба қалби мукаддари зайнаб

نکرد رحم به قلب مکدر زینب

Ба каъб найза зад аз қаҳр бар сари зайнаб

به کعب نیزه زد از قهر بر سر زینب

Дили шикаста ӯро зи қаҳри пар хӯн кард

دل شکسته او را ز قهر پر خون کرد

Ба таъна гуфт ки эй духтари алии баргард

به طعنه گفت که ای دختر علی برگرد

Бирав ки рӯй ҳусайнро дигар нахоҳӣ дид

برو که روی حسین را دگر نخواهی دید

Гулии з рӯй ҳусайнат дигар нахоҳӣ чид

گلی ز روی حسینت دگر نخواهی چید

Ба ҷони зайнаб аз ин гуфтугӯи шарари афканд

به جان زینب از این گفتگو شرر افکند

Садои зайнаби длхўн ба нолаи гашти баланд

صدای زینب دلخون به ناله گشت بلند

Басаст ӣнқадар аз дида ашкбор машав

بسست اینقدر از دیده اشکبار مشو

Бигир дасти ятемони ман ба хайма бирав

بگیر دست یتیمان من به خیمه برو

Ки то ба куштани ман оҳу нолаи срнкнӣ

که تا به کشتن من آه و ناله سرنکنی

Ба теғи шимур ва ба ҳулқуми ман назар накунӣ

به تیغ شمر و به حلقوم من نظر نکنی

Дили ту тоб надорад ки сӯии шимури шарир

دل تو تاب ندارد که سوی شمر شریر

Кунӣ назар ки кашад бар гулӯии ман шамшер

کنی نظر که کشد بر گلوی من شمشیر

Бирав чу ( сомит ) афсурдаи шӯр ва ғавғо кун

برو چو (صامت) افسرده شور و غوغا کن

Азоӣ бе касемро ба даҳр барпо кун

عزای بی‌کسیم را به دهر برپا کن