Ривоятаст ки хатми русули шаби миъроҷ
روایتست که ختم رسل شب معراج
Чу аз тақрйви эзади ниҳод бар сари тоҷ
چو از تقریب ایزد نهاد بر سر تاج
Ба баҳри ваҳдати якто чунон шуд Аҳмади ғарқ
به بحر وحدت یکتا چنان شد احمد غرق
Ки ғайр мем аҳадро намонад зи Аҳмади фарқ
که غیر میم احد را نماند ز احمد فرق
Пас аз ифозаи файзи ҳузуру қурби вусӯл
پس از افاضه فیض حضور و قرب وصول
Ки кард қавси суъӯдаш ба сӯии хоки нузул
که کرد قوس صعودش به سوی خاک نزول
Дар осмони чаҳоруми зи фалак ӯ аднӣ
در آسمان چهارم ز فلک او ادنی
Расед чун маи афлоки лайлаи алосрӣ
رسید چون مه افلاک لیله الاسری
Ҷаноби Мӯсои умрон ба таҳният бикшод
جناب موسی عمران به تهنیت بگشاد
Лаби мубораки худ аз паии мубораки бод
لب مبارک خود از پی مبارک باد
Суол кард ки эй раҳсипори арши азим
سئوال کرد که ای رهسپار عرش عظیم
Чаҳ кард бо ту зи алтофи кирдигори Карим
چه کرد با تو ز الطاف کردگار کریم
Ҷавоб дод ки бар ман худои поки вдўд
جواب داد که بر من خدای پاک ودود
зи марҳамат дар эҳсону базл ва ҷӯад гушӯд
ز مرحمت در احسان و بذل و جود گشود
Қарор дод ки панҷоҳ вақти баҳри ниёз
قرار داد که پنجاه وقت بهر نیاز
Кунанд ҳар шабу рӯзи умматами адои намоз
کنند هر شب و روز امتم ادای نماز
Кулем гуфт ки эй бурҷи ахтари рифъат
کلیم گفت که ای برج اختر رفعت
Ба уммат ту намебошад он қадри тоқат
به امت تو نمیباشد آنقدر طاقت
Ба сӯии ҳақи паии тахфифи ҳол раҷъат кун
به سوی حق پی تخفیف حال رجعت کن
Барои уммати худ аз худо шафоат кун
برای امت خود از خدا شفاعت کن
Чаҳор бо набӣ назд ҳазрати якто
چهار با نبی نزد حضرت یکتا
Намӯд рӯй шафоат ба хоҳиши Мӯсо
نمود روی شفاعت به خواهش موسی
Ба он ҷаноби баҳри навбат аз худои Маҷид
به آن جناب بهر نوبت از خدای مجید
Навиди бахшишу тахфифу файз ва лутф расед
نوید بخشش و تخفیف و فیض و لطف رسید
Барои хоҳиши Аҳмади намози охири кор
برای خواهش احمد نماز آخر کار
Ба панҷ вақти зи панҷоҳ вақт ёфт қарор
به پنج وقت ز پنجاه وقت یافت قرار
Намӯд дар раҳи уммати таҳаммули заҳмат
نمود در ره امت تحمل زحمت
Ки то кунанд талофӣ ба итраташи уммат
که تا کنند تلافی به عترتش امت
Вале ба Марӣа аз лашкари убайди зиёд
ولی به ماریه از لشکر عبید زیاد
Касе ба сибти набии муҳлати намози надод
کسی به سبط نبی مهلت نماز نداد
Талаб намӯд ҳусайнаш чу рӯзи ошуро
طلب نمود حسینش چو روز عاشورا
Паии намози амон аз ҷамоати аъдо
پی نماز امان از جماعت اعدا
Ҷавоб дод лъинӣ аз он гуруҳи ҷҳўл
جواب داد لعینی از آن گروه جهول
Ки эй ҳусайни намози ту кӣ буд мақбул
که ای حسین نماز تو کی بود مقبول
Ду тани зи ёвару ансори сибти паямбар
دو تن ز یاور و انصار سبط پیمبر
Ба пеши тири балои ҷон худ намӯд сипар
به پیش تیر بلا جان خود نمود سپر
Ба хок кард таяммуми амири малики ҳиҷоз
به خاک کرد تیمم امیر ملک حجاز
зи қаҳти об ба ҷои вузӯ барои намоз
ز قحط آب به جای وضو برای نماز
Кашид савти азони қосими ҳазини зи ҷигар
کشید صوت اذان قاسم حزین ز جگر
Иқома гуфт алии Акбар аз барои падар
اقامه گفت علی اکبر از برای پدر
зи хавфи тири мухолиф ки буд дар парвоз
ز خوف تیر مخالف که بود در پرواز
Чаҳ гӯям онкии шаҳи дайн чигуна кард намоз
چه گویم آنکه شه دین چگونه کرد نماز
Чисони намоз ки аз Карбало ба чархи асир
چسان نماز که از کربلا به چرخ اثیر
Баланд буд зи такбири хасми ғурраши тир
بلند بود ز تکبیر خصم غرش تیر
Намӯд ҳамраҳи асҳоби сидолшҳдоء
نمود همره اصحاب سیدالشهداء
Бад-ӣни тариқи ҷмоиъти намози зуҳри ниҳод
بدین طریق جمایعت نماز ظهر نهاد
Вале ба асри намозаш дигар Фродо буд
ولی به عصر نمازش دگر فرادا بود
Ки зери ханҷари шимури шарир танҳо буд
که زیر خنجر شمر شریر تنها بود
Ба зуҳр кард таяммум агар зи зулми аду
به ظهر کرد تیمم اگر ز ظلم عدو
з хӯн гирифт барои намози асри вузӯ
ز خون گرفت برای نماز عصر وضو
Гуҳии зи хӯни ҷабини обрӯии худ май ҷуст
گهی ز خون جبین آبروی خود میجست
Гуҳии зи ташнаи лабии дастро зҷон май шаст
گهی ز تشنه لبی دست را زجان میشست
Мухаддироти ҳаримаш ба ҷои зикри азон
مخدرات حریمش به جای ذکر اذان
Ҳама чу мори гузида ба аломону фиғон
همه چو مار گزیده به الامان و فغان
Кашид ҷои иқомаи хурӯшу нолау оҳ
کشید جای اقامه خروش و ناله و آه
Миёни домани ваии шоҳзодаи Абдуллоҳ
میان دامن وی شاهزاده عبدالله
Ба ҷой бастани эҳрому гуфтани такбир
به جای بستن احرام و گفتن تکبیر
Баланд кард ба рӯй ду дасти Тифли сағир
بلند کرد به روی دو دست طفل صغیر
зи зарбати чикмаи шимури ситамгари мардӯд
ز ضربت چکمه شمر ستمگر مردود
Гузашта буд намози вай аз қиёму қууд
گذشته بود نماز وی از قیام و قعود
Паии қунути гуҳии рози ҷӯии довар буд
پی قنوت گهی راز جوی داور بود
Гуҳӣ ба фикри ғами уммати паямбар буд
گهی به فکر غم امت پیمبر بود
Дарид тири се шуъба чу ноф ӯ аз ҳам
درید تیر سه شعبه چو ناف او از هم
Паии рукӯъу суҷуди гоҳ рост шуд гуҳи хам
پی رکوع و سجود گاه راست شد گه خم
Ба зери лаби нафасии зикр алътш ме кард
به زیر لب نفسی ذکر العطش میکرد
Дамӣ дигар зи аташи зери теғ ғаш ме кард
دمی دگر ز عطش زیر تیغ غش میکرد
Гуҳӣ ба шимури сухани баҳри об брлб дошт
گهی به شمر سخن بهر آب برلب داشت
Гуҳии назар ба дар хаймаи сӯй зайнаб дошт
گهی نظر به در خیمه سوی زینب داشت
Ба саҷда буд сари он шаҳиди роҳи худо
به سجده بود سر آن شهید راه خدا
Ки аз қафои сар ӯро намӯд шимури ҷудо
که از قفا سر او را نمود شمر جدا
Ба фарқ ( сомит ) бечора оқибат шуд хок
به فرق (صامت) بیچاره عاقبت شد خاک
зи қатли зинати оғӯши Сайиди лўлок
ز قتل زینت آغوش سید لولاک