Ривоятаст ки чун итрати расӯли аллоҳ

روایت است که چون عترت رسول‌الله

Сӯии Мадинаи расиданд бо хурӯши зи роҳ

سوی مدینه رسیدند با خروش ز راه

Хамидаи зайнаб бе ғмгсори гашти равон

خمیده زینب بی‌غمگسار گشت روان

Миёни равзаи модар ба нолау афғон

میان روضه مادر به ناله و افغان

Салом кард ба ҳасрат фиканд сар дар пеш

سلام کرد به حسرت فکند سر در پیش

Забони ҳол ба модар бигуфт бо дили риш

زبان حال به مادر بگفت با دل ریش

Ки эй стмкши айёми чашми ту равшан

که ای ستمکش ایام چشم تو روشن

Ки зайнабати зи сафар омадааст сӯии ватан

که زینبت ز سفر آمده است سوی وطن

Сиррӣ бар ори зи хок ва ба пресс аҳволам

سری بر آر ز خاک و به پرس احوالم

Назора кун ки чисон гаштааст иқболам

نظاره کن که چسان گشته است اقبالم

з ман бипурс ки зайнаб чаҳ шуд бародари ту

ز من بپرس که زینب چه شد برادر تو

з доғ кист ки гашта сиёҳи мъҷри ту

ز داغ کیست که گشته سیاه معجر تو

зи Карбалои ту чаро бе бародари омада Эй

ز کربلا تو چرا بی‌برادر آمده‌ای

Чунин шикастаи дилу хок бар сари омада Эй

چنین شکسته دل و خاک بر سر آمده‌ای

Барам зи Кӯфа ва ё Карбало ба назд ту ном

برم ز کوفه و یا کربلا به نزد تو نام

Ва ё зи шому язиди лъини бдФрҷом

و یا ز شام و یزید لعین بدفرجام

Ба Карбалои з ситам сӯхтанд хонаи мо

به کربلا ز ستم سوختند خانه ما

Ббод дод фалаки хоки ошиёнаи мо

بباد داد فلک خاک آشیانه ما

Маро ба гӯшаи зиндони ҳамин на маъво дод

مرا به گوشه زندان همین نه ماوا داد

Ба Кӯфаи ҳукм ба қатлам намӯд ибни зиёд

به کوفه حکم به قتلم نمود ابن زیاد

Миён Кӯфа надидӣ чисони зи оташи дил

میان کوفه ندیدی چسان ز آتش دل

Задам зи ғуссаи сари хад ба чӯбаи маҳмил

زدم ز غصه سر خد به چوبه محمل

Ки шуд зи хӯни серум рӯйу мӯии ман рангин

که شد ز خون سرم روی و موی من رنگین

Равона шуд зи серуми ҳамчуи сайли хӯн ба замин

روانه شد ز سرم همچو سیل خون به زمین

зи Кӯфа то ба сӯии шом дар баробари ман

ز کوفه تا به سوی شام در برابر من

Ба пеши маҳмили ман бади сари бародари ман

به پیش محمل من بد سر برادر من

Шудам чу воридашам хароб эй модар

شدم چو وارد اشم خراب ای مادر

Харобаи манзили мо буду хоки раҳи бистар

خرابه منزل ما بود و خاک ره بستر

Касе ки мӯнису ғмхўору ҳамдами мо буд

کسی که مونس و غمخوار و همدم ما بود

Мудоми сангу неу чӯби сахти аъдо буд

مدام سنگ و نی و چوب سخت اعدا بود

Тамоми кӯчау бозрои шоми ойини баст

تمام کوچه و بازرا شام آئین بست

Язиди дун ба сари тахт зарнигор нишаст

یزید دون به سر تخت زرنگار نشست

Ба базми ом талаб кард он лъини ғаюр

به بزم عام طلب کرد آن لعین غیور

Сари бараҳнаи ману аҳли байтро ба ҳузур

سر برهنه من و اهل بیت را به حضور

Чунон намӯд ҷафои язиди мадҳушам

چنان نمود جفای یزید مدهوشم

Ки шуд зи шимуру сифати Карбалои Фромўшшм

که شد ز شمر و صفت کربلا فراموششم

Ба пеши дидаи ман он ситамгари кунин

به پیش دیده من آن ستمگر کونین

Бузад ба чӯби ситам бар лабу даҳони ҳусайн

بزد به چوب ستم بر لب و دهان حسین

Гузаштаи зини ҳамаи як сурхи мӯ ба базми язид

گذشته زین همه یک سرخ مو به بزم یزید

зи хонадони набувват каниз ме талабед

ز خاندان نبوت کنیز می‌طلبید

Басаст ( сомит ) афсурдаи зин азо бигузар

بس است (صامت) افسرده زین عزا بگذر

Ки аз саркаши ду чашмат сиёҳ шуд дафтар

که از سرکش دو چشمت سیاه شد دفتر