Боз аз ғами руқияи дили пари з оҳ кардам
باز از غم رقیه دل پر ز آه کردم
Чун ёди гуфтугӯяш бо наъш шоҳ кардам
چون یاد گفتگویش با نعش شاه کردم
Гуфт эй сар аз фароғати ҷонро табоҳ кардам
گفت ای سر از فراغت جان را تباه کردم
Имшаби туро ба хӯбии нисбат ба моҳ кардам
امشب تو را به خوبی نسبت به ماه کردم
Ту хубтар зи моҳии ман иштибоҳ кардам
تو خوب تر ز ماهی من اشتباه کردم
Бобо бигир дастами дигари з по фитодам
بابا بگیر دستم دیگر ز پا فتادم
Аз бас ки васли рӯят бар хеш ваъда додам
از بس که وصل رویت بر خویش وعده دادم
Шукри худо ки гардид охири равои муродам
شکر خدا که گردید آخر روا مرادم
Дӯшинаи пеши рӯяти ойинаро ниҳодам
دوشینه پیش رویت آئینه را نهادم
Рӯзи сифеди худро охир сиёҳ кардам
روز سفید خود را آخر سیاه کردم
Ингуна бевФиӣ аз ту гумон набудам
اینگونه بیوفیی از تو گمان نبودم
Пеш аз ҷудои ту эй кош мурда будам
پیش از جدایی تو ای کاش مرده بودم
То таънаи ятемӣ аз кас наме шунӯдам
تا طعنه یتیمی از کس نمیشنودم
Ҳар субҳи фикри рӯят то шомгаҳ намудем
هر صبح فکر رویت تا شامگه نمودم
Ҳар шоми юади мӯят то субҳгоҳ кардам
هر شام یود مویت تا صبحگاه کردم
Май хостии зи аввал аз ман ҷудо нагардӣ
میخواستی ز اول از من جدا نگردی
То ман намекашидам зи атфоли ранги зардӣ
تا من نمیکشیدم ز اطفال رنگ زردی
Дардӣ ба сина дорам аммо чигуна дардӣ
دردی به سینه دارم اما چگونه دردی
Ту ончӣ дӯш кардӣ аз тир ғамза кардӣ
تو آنچه دوش کردی از تیر غمزه کردی
Имшаби ман ончӣ кардам аз барқ оҳ кардам
امشب من آنچه کردم از برق آه کردم
Он шаб ки дар раҳи шоми рост ба найза дидам
آن شب که در ره شام راست به نیزه دیدم
Бо он нигоҳи ҳасрати оҳ аз ҷигар кашидам
با آن نگاه حسرت آه از جگر کشیدم
Пинҳони зи хавфи аъдои сӯй ту ме давидем
پنهان ز خوف اعدا سوی تو میدویدیم
Сад гӯшмол хӯрдам то як сухан шунидам
صد گوشمال خوردم تا یک سخن شنیدم
Садра ба хӯни тпидм то як нигоҳ кардам
صدره به خون طپیدم تا یک نگاه کردم
Баргӯ язиди кофари дигар ба мо бубахшад
برگو یزید کافر دیگر به ما ببخشد
Саҷҷодро ба ғурбати зин ибтило бубахшад
سجاد را به غربت زین ابتلا ببخشد
Брмостм кунад бас гуяд худо бубахшад
برماستم کند بس گوید خدا ببخشد
Хоҷа ба рӯзи маҳшари ҷурм маро бубахшад
خواجه به روز محشر جرم مرا ببخشد
Каз ваъдаи атояши умрӣ гуноҳ кардам
کز وعده عطایش عمری گناه کردم
Шоҳо ба мотами ту шаб то саҳари нхФтм
شاها به ماتم تو شب تا سحر نخفتم
Дарди дилами ту донеи дигар ба кас нагуфтам
درد دلم تو دانی دیگر به کس نگفتم
Чун ( сомит ) дар азоят дар мақоли сифтам
چون (صامت) در عزایت در مقال سفتم
Дар ошиқии фурӯғии ман ҳар ғазал ки гуфтам
در عاشقی فروغی من هر غزل که گفتم
Як ҷои гурез ӯро бар ном шоҳ кардам
یک جا گریز او را بر نام شاه کردم