Зайнаб ба ҳусайн гуфт ки эй тоҷи сари мо
زینب به حسین گفت که ای تاج سر ما
эй қофилаи солори ману ҳамсафари мо
ای قافله سالار من و همسفر ما
Осӯда бихобӣ чаҳ хуш аз раҳгузари мо
آسوده بخوابی چه خوش از رهگذر ما
Нагузошт ки бар рӯй ту уфтад назари мо
نگذاشت که بر روی تو افتد نظر ما
Дидӣ ки чҳо кард ба мо чашмтар мо
دیدی که چها کرد به ما چشم تر ما
Тоқат каму ғам беш замони кӯтаҳ ки тавонад
طاقت کم و غم بیش زمان کوته که تواند
То дарди гирифтории мо бар ту расонад
تا درد گرفتاری ما بر تو رساند
Кӯи марг ки аз қайд ҳаётам барраанд
کو مرگ که از قید حیاتم برهاند
Аҳволи дили сӯхтаи дил сӯхта донад
احوال دل سوخته دل سوخته داند
Аз шамъ бипурсед зи сӯзи ҷигари мо
از شمع بپرسید ز سوز جگر ما
эй каъба ислом кашидем сӯии дайр
ای کعبه اسلام کشیدیم سوی دیر
Рахт аз сӯии кӯии ту худованд кунад хайр
رخت از سوی کوی تو خداوند کند خیر
Бо шимури ситамкори ҷафои ҷӯии сбксир
با شمر ستمکار جفا جوی سبکسیر
Гӯи ин ҳама шодӣ макун аз рафтан мо ғайр
گو این همه شادی مکن از رفتن ما غیر
Гоҳе набӯд беш зи кӯяши сафари мо
گاهی نبود بیش ز کویش سفر ما
Доғи ту бар оварад зи конӯни дилами дӯд
داغ تو بر آورد ز کانون دلم دود
Дӯдӣ ки бисӯзад зи туфаши оташи намруд
دودی که بسوزد ز تفش آتش نمرود
Зини меҳнат бисёр ки дорам ҳамаи мавҷӯд
زین محنت بسیار که دارم همه موجود
Ғайрим ба фусун кард ҷудо аз ту чаҳ май буд
غیرم به فسون کرد جدا از تو چه میبود
Гар дошт асари тири дуои саҳари мо
گر داشت اثر تیر دعای سحر ما
То даҳр чаҳ хоҳад зи ман сӯхтаи кавкаб
تا دهر چه خواهد ز من سوخته کوکب
Каз доғи ғамати рӯзи марои сохта чун шаб
کز داغ غمت روز مرا ساخته چون شب
Вази санги адуи ҷони зи тъби омада бар лаб
وز سنگ عدو جان ز تعب آمده بر لب
То аз паии озор ки гирди омадаи имшаб
تا از پی آزار که گرد آمده امشب
Ҷамъанд рақибони басари раҳгузари мо
جمعند رقیبان بسر رهگذر ما
Омад ба сари наъши ту хоҳари пай дидан
آمد به سر نعش تو خواهر پی دیدن
Шуд ғунчаи дидори туро мавсим чидан
شد غنچه دیدار تو را موسم چیدن
Даҳ гӯш ба дардам буд армил шунидам
ده گوش به دردم بود ارمیل شنیدم
Шодам ки з Кувайт натавонам ба паридан
شادم که ز کویت نتوانم به پریدن
Бшктаҳ шуд аз санги ситами болу пари мо
بشکته شد از سنگ ستم بال و پر ما
То тоби аташи лолаи сероби ту пжмрд
تا تاب عطش لاله سیراب تو پژمرد
Шамъи рухи рангини ту аз сарсари кини барад
شمع رخ رنگین تو از صرصر کین برد
Бар шиша бе тобии ман санг ҷафо хӯрд
بر شیشه بیتابی من سنگ جفا خورد
Зини банки ҷараси роҳ ба ҷое натавон барад
زین بانک جرس راه به جایی نتوان برد
Кӯи Хизри раҳе то ки шавад роҳбари мо
کو خضر رهی تا که شود راهبر ما
Аз баси бшаҳи ташнаи ҷигари роз ниҳон гуфт
از بس بشه تشنه جگر راز نهان گفت
Рози ғами пинҳон ба бародар ба аён гуфт
راز غم پنهان به برادر به عیان گفت
( сомит ) ба амонами омада ҳар дам ба фиғон гуфт
(صامت) به امانم آمده هر دم به فغان گفت
Имшаби ҳамаи миҷмари сухан аз сӯхтагон гуфт
امشب همه مجمر سخن از سوختگان گفت