эй рафиқони дӯши моро дар сароеи сур буд
ای رفیقان دوش ما را در سرایی سور بود
Рафтам онҷо гарчи роҳии саъбу шаби диҷўр буд
رفتم آنجا گرچه راهی صعب و شب دیجور بود
Дидам андари роҳи зии даргоҳи он шоҳ батон
دیدم اندر راه زی درگاه آن شاه بتان
Ҳар чаҳ андари кули олами ошиқии мастур буд
هر چه اندر کل عالم عاشقی مستور بود
Аз чароғу шамъи касро ёди номад зон сабаб
از چراغ و شمع کس را یاد نامد زان سبب
Каз ҷамоли хуби рӯйони нури андари нур буд
کز جمال خوب رویان نور اندر نور بود
Кас нисорӣ кард натавонист андар хӯрд ӯ
کس نثاری کرد نتوانست اندر خورد او
Зон ки ашки ошиқонаши лўлўи мансур буд
زان که اشک عاشقانش لولو منثور بود
Буи хуш намад ба кори андари саросари кӯй ӯ
بوی خوش نمد به کار اندر سراسر کوی او
Зон ки хоки кӯй ӯ аз анбару кофур буд
زان که خاک کوی او از عنبر و کافور بود
Фарши майдонаши зи рухсору лаби михўоргон
فرش میدانش ز رخسار و لب میخوارگان
Такяи гоҳи ошиқонаши дидаҳои ҳур буд
تکیهگاه عاشقانش دیدههای حور بود
Ҷӯйборашро ба ҷой об медидам шароб
جویبارش را به جای آب میدیدم شراب
Зер ҳар шохии ҳазорон ошиқи махмур буд
زیر هر شاخی هزاران عاشق مخمور بود
эй басои мазкӯри олами кӯи бадв дар нанагирист
ای بسا مذکور عالم کو بدو در ننگریست
эй басои дарвеши дили ришо ки ӯ мазкӯр буд
ای بسا درویش دل ریشا که او مذکور بود
Ҳар ки аз вай буд тарсон ӯ бадв наздик шуд
هر که از وی بود ترسان او بدو نزدیک شد
Ва онкӣ аз густохяши наздиктар ӯ давр буд
و آنکه از گستاخیش نزدیکتر او دور بود
Сад ҳазорон ҳамчуи Мӯсои хира буд андари раҳаш
صد هزاران همچو موسی خیره بود اندر رهش
Зон ки ҳар сангӣ дар он раҳ бар мисоли тавр буд
زان که هر سنگی در آن ره بر مثال طور بود
Ҳркро тўқиъ доданд аз ҷамол ва аз ҷалол
هرکرا توقیع دادند از جمال و از جلال
« лнтароне » бар сари тўқиъи он маншур буд
«لن ترانی» بر سر توقیع آن منشور بود
Ҳоиҳои ошиқон бо ҳўии ҳўии содиқон
های های عاشقان با هوی هوی صادقان
Кас надонистӣ ки мотам буд он ё сур буд
کس ندانستی که ماتم بود آن یا سور بود
Мари маро раҳ дод дарбони дигаронро манъ кард
مر مرا ره داد دربان دیگران را منع کرد
Зон ки номи ман раҳе дар ошиқии машҳур буд
زان که نام من رهی در عاشقی مشهور بود
Чун дар он шаби шахси рӯҳам назд он ҳазрат расед
چون در آن شب شخص روحم نزد آن حضرت رسید
Сӯрат ҳастӣ надидам нақши ман мақҳур буд
صورت هستی ندیدم نقش من مقهور بود
Мусҳафӣ дидам гирифтаи он бути андари дасти рост
مصحفی دیدم گرفته آن بت اندر دست راست
Хати он аз ҳаст мо вази нафии ломстўр буд
خط آن از هست ما وز نفی لامسطور بود
Чун дар он мусҳаф назар кардам саросари хати он
چون در آن مصحف نظر کردم سراسر خط آن
Рамзҳои маҷлиси мҳмдбни Мансур буд
رمزهای مجلس محمدبن منصور بود