То гули лаъл рӯй бинмудаст

تا گل لعل روی بنمودست

Булбул аз хуррамӣ нёсудаст

بلبل از خرمی نیاسودست

Диргоҳст то чу ман булбул

دیرگاهست تا چو من بلبل

Ошиқи бӯстон ва гул будаст

عاشق بوستان و گل بودست

Рӯзу шабгар бнғнўм чаҳ аҷаб

روز و شب گر بنغنوم چه عجب

Пеши маъшӯқи каси бнғнўдст

پیش معشوق کس بنغنودست

Ман ғуломи забони он булбул

من غلام زبان آن بلبل

Кӯи гули лаъли равиши бстўдст

کو گل لعل روش بستودست

Соқиои вақти гул чу гул май даҳ

ساقیا وقت گل چو گل می ده

Вақти гули ту ба кас нафармудаст

وقت گل تو به کس نفرمودست

Хониш
шморҳ 32 — ъндлӣб