Тавбаи ман ҷазаъу лаълу зулфу рухсорати шикаст

توبهٔ من جزع و لعل و زلف و رخسارت شکست

Дай ки будам рӯзаи дор имрӯз ҳастам бути параст

دی که بودم روزه‌دار امروز هستم بت‌پرست

Аз таронаи ишқи ту нури набии мавқуфи гашт

از ترانهٔ عشق تو نور نبی موقوف گشت

Вази мғобаҳи ҷоми ту қандилҳо бар ҳам шикаст

وز مغابهٔ جام تو قندیلها بر هم شکست

Рамзҳои лаъли ту дасти ҷавонмардони кушод

رمزهای لعل تو دست جوانمردان گشاد

Ҳалқаҳои зулфи ту пой хирадмандон бибаст

حلقه‌های زلف تو پای خردمندان ببست

Абрӯии мақрунат эй дилбари камон андар кашид

ابروی مقرونت ای دلبر کمان اندر کشید

Новаки мижгонат эй ҷонони дил ва ҷонам бахаст

ناوک مژگانت ای جانان دل و جانم بخست

Бо чунон мижгону абрӯ бо чунон рухсору лаб

با چنان مژگان و ابرو با چنان رخسار و لب

Буд натавон ҷузи сабуру ошиқу махмуру маст

بود نتوان جز صبور و عاشق و مخمور و مست

Порсоеро буд дар ишқи ту бозори суст

پارسایی را بود در عشق تو بازار سست

Подшоҳиро буд дар васли ту миқдори паст

پادشاهی را بود در وصل تو مقدار پست

Ҷуз барои ту насозам ман зи фарқи хеши пой

جز برای تو نسازم من ز فرق خویش پای

Ҷуз ба ёд ту наёрам сӯии ратлу ҷоми даст

جز به یاد تو نیارم سوی رطل و جام دست

Шодӣ ва ором набӯд ҳар крои васл ту нест

شادی و آرام نبود هر کرا وصل تو نیست

Ҳар крои васл ту бошад ҳар чаҳ бояд ҷумла ҳаст

هر کرا وصل تو باشد هر چه باید جمله هست

Хониш
шморҳ 42 — ъндлӣб