Як рӯз набошад ки ту бо кибр ва манӣ

یک روز نباشد که تو با کبر و منی

Сад теғи ҷафо бар ман мискин назанӣ

صد تیغ جفا بر من مسکین نزنی

Он рӯз ки кам бошад он мумтаҳанӣ

آن روز که کم باشد آن ممتحنی

Аз кӯҳи паланги оре ва дар ман Фгнӣ

از کوه پلنگ آری و در من فگنی