На бипурсед коҳилии зи алӣ

نه بپرسید کاهلی ز علی

Чун шунид аз забони дили гусалӣ

چون شنید از زبان دل گسلی

Ки бигӯӣ эй амири ҷони афрӯз

که بگوی ای امیر جان افروز

Ки шаби тира ба буд ё рӯз

که شب تیره به بود یا روز

Муртазо гуфт бишинав эй соил

مرتضی گفت بشنو ای سایل

Сӯии идбор худ машав моил

سوی ادبار خود مشو مایل

Ошиқонро дар ин раҳи ҷонсӯз

عاشقان را در این ره جانسوز

Табаши роз ба ки тобиши рӯз

تبش راز به که تابش روز

Ҳарки дорад раҳи табаш дар дил

هرکه دارد ره تبش در دل

Дар намонад пиёда дар манзил

در نماند پیاده در منزل

Дар ҷаҳонӣ ки ишқ гуяд роз

در جهانی که عشق گوید راز

На ту Монӣ на низ ақли ту боз

نه تو مانی نه نیز عقل تو باز