Ҷузи ду рангӣ нашуд зи марги ҳалок
جز دو رنگی نشد ز مرگ هلاک
Марди як рангро зи марг чаҳ бок
مرد یک رنگ را ز مرگ چه باک
Маҷлиси ваъз рафтанат ҳавасаст
مجلس وعظ رفتنت هوسست
Марги ҳамсояи воъиз ту басаст
مرگ همسایه واعظ تو بسست
Маргро дар сарои пичопич
مرگ را در سرای پیچاپیچ
Пеш то соя афганд ба бсич
پیش تا سایه افگند به بسیچ
Зодагон чун раҳм бипардозанд
زادگان چون رحم بپردازند
Сафари марги хешро созанд
سفر مرگ خویش را سازند
Ту ба перии з марг нандешӣ
تو به پیری ز مرگ نندیشی
Малики аламутро магари хешӣ
ملکالموت را مگر خویشی
Вагар айдун ки хешии ту дуруст
وگر ایدون که خویشی تو دُرست
Ҳаст бории бохр ва ба нахуст
هست باری بآخر و به نخست
Накунад суду ҷузи зиёни надиҳад
نکند سود و جز زیان ندهد
Ки варо низ аҷали амони надиҳад
که ورا نیز اجل امان ندهد
Сӯй маргаст халқро оҳанг
سوی مرگ است خلق را آهنگ
Дам задани гому рӯзу шаби фарсанг
دم زدن گام و روز و شب فرسنگ
Ҷонпазирон чаҳ бенаво чаҳ ба барг
جان پذیران چه بینوا چه به برگ
Ҳама дар киштӣанду соҳили марг
همه در کشتیاند و ساحل مرگ
Ҳастӣ ҳақ завол напазирад
هستی حق زوال نپذیرد
Онкии марги офарид кӣ мерад
آنکه مرگ آفرید کی میرد
Пеши он кас ки қадар дайн донад
پیش آنکس که قدر دین داند
Саргузашти амл аҷал хонд
سرگذشت امل اجل خواند