Дили змни баради онкии ҷонро назд ӯ мқдорнист
دل زمن برد آنکه جان را نزد او مقدارنیست
Як ҷаҳони ушшоқро дили барда вдлдор нест
یک جهان عشاق را دل برده ودلدار نیست
Ҳаркии тарк ҷон кунад осони бадасти оради дилаш
هرکه ترک جان کند آسان بدست آرد دلش
Гар бадаст ояд дил ӯ тарки ҷон душвор нест
گر بدست آید دل او ترک جان دشوار نیست
Дар балои ишқ ӯ беихтиёр афтода ам
در بلای عشق او بی اختیار افتاده ام
Гарчи ин мазҳаб надорам кодмӣ мухтор нест
گرچه این مذهب ندارم کآدمی مختار نیست
Гуфтам андари кунҷи азлати рӯ бдиўор оварам
گفتم اندر کنج عزلت رو بدیوار آورم
Чун кунам дар шаҳри мо як хонаро девор нест
چون کنم در شهر ما یک خانه را دیوار نیست
Дӯсти азмо бениёзу васли морои ногузир
دوست ازما بی نیاز و وصل مارا ناگزیر
Ишқ бо ҷон ҳамнишин всбр бо дили ёрнист
عشق با جان همنشین وصبر با دل یارنیست
Грчўи саги азкўӣ ӯ нонеи хурии андаки мадон
گرچو سگ ازکوی او نانی خوری اندک مدان
Вари сегон кӯии ӯрои ҷони диҳӣ бисёр нест
ور سگان کوی اورا جان دهی بسیار نیست
Ҳазрат ӯ манзил асҳоб Каҳфаст эй аҷаб
حضرت او منزل اصحاب کهفست ای عجب
Кандар он ҳазрати сегонро борўморо бор нест
کاندر آن حضرت سگان را بارومارا بار نیست
эй зтўи рӯзами сияҳ , шабҳо ки мардум хуфта анд
ای زتو روزم سیه، شبها که مردم خفته اند
Ҷузи саги вмни ҳеҷ кас дар кӯии ту бедор нест
جز سگ ومن هیچ کس در کوی تو بیدار نیست
Бори ишқат май кашами хуши зонкаҳи мари Фарҳод ро
بار عشقت می کشم خوش زآنکه مر فرهاد را
Кӯҳ кандан бар умеди васли ширин бор нест
کوه کندن بر امید وصل شیرین بار نیست
Гар сарат дар пои нуҳуми вари теғ бар фарқами занӣ
گر سرت در پا نهم ور تیغ بر فرقم زنی
Аз миннати хўшнўдӣ эй ҷони взтўом озор нест
از منت خوشنودی ای جان وزتوام آزار نیست
Вар нгорстон шавад пушти замин аз рӯй гул
ور نگارستان شود پشت زمین از روی گل
Булбули ҷони марои ҷуз рӯй ту гулзор нест
بلبل جان مرا جز روی تو گلزار نیست
Рост гуфтӣ озмудам бо ту гаштами муттафиқ
راست گفتی آزمودم با تو گشتم متفق
( эй ки гуфтӣ ҳеҷ мушкил чун фироқ ёр нест )
(ای که گفتی هیچ مشکل چون فراق یار نیست)
Сайфи фарғонии чўмнгар ҳоҷатӣ дорӣ бадваст
سیف فرغانی چومن گر حاجتی داری بدوست
Дӯсти худ ногуфта донад , ҳоҷат гуфтор нест
دوست خود ناگفته داند، حاجت گفتار نیست